सलाम: ताकि हमेशा घरों में ही बर्तन ना साफ करते रहें ये मासूम
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इंदिरापुरम में घरेलू कामकाज करने वाले लोगों के बच्चों को शिक्षा देने वाले अनौपचारिक स्कूल 'ज्ञानदीप' को एक वर्ष पूरा हो गया है। दोपहर में चलने वाले इस स्कूल में उन बच्चों को भी पढ़ाई होती है जो स्कूल जाते हैं और कुछ उन बच्चों को भी पढ़ाया जाता है जो स्कूल नहीं जा पाते।
महागुन मेंशन फ़ेज़ -1 में चलने वाले इस स्कूल में कुछ गृहणियां दोपहर को समय निकालकर बच्चों को पढ़ाती हैं। पढ़ाई के अलावा इस स्कूल में बच्चों को ड्रॉइंग, पेंटिंग के अलावा संगीत की भी अनौपचारिक शिक्षा दी जाती है।
स्कूल की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाने वाले एमसी सक्सेना ने अमर उजाला को बताया कि हर दिन लगभग 20 से 25 बच्चे आते हैं। इनमें से कुछ बच्चे इंदिरापुरम के घरों में काम करने वाली महिलाओं के बच्चे हैं तो कुछ धोबी, ड्राइवर आदि के बच्चे हैं। कुछ बच्चे ख़ुद ही घरों में काम करने वाले हैं।
इस स्कूल में नीलम भुल्लर, सुमन सक्सेना और जया वर्मा नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रही है। महागुन मेंशन फेज-1 आरडब्लूए ने इस स्कूल के लिए अपनी लाइब्रेरी उपलब्ध करवाई है। बच्चों के लिए स्टेशनरी आदि का खर्च समय समय पर मिलने वाली दान की राशि से चलता है।
विशेष अवसरों पर बच्चे कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं। स्कूल के एक वर्ष पूरा होने और स्वतंत्रता दिवस पर इन बच्चों ने विशेष कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।
महागुन के वरिष्ठ नागरिक और पूर्व पत्रकार डॉ. ताराचंद्र पाल बेकल ने इस कार्यक्रम में स्कूल की तारीफ करते हुए कहा कि ये जरूरतमंद बच्चों के लिए बड़ी सहायता है और महिला-शक्ति इन बच्चों के लिए बड़ा काम कर रही है। उन्होंने ये भी कहा कि इस काम को प्रोत्साहित करने की जरूरत है।