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Delhi NCR News: जेएनयू लाइब्रेरी में हंगामा, टूटे शीशे, छात्र संघ अध्यक्ष चोटिल
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- वायरल वीडियो में छात्र संघ अध्यक्ष भी तोड़ते दिखे दरवाजे के शीशे, लाइब्रेरी में फेस रिकग्निशन प्रणाली लागू करने का विरोध कर रहे हैं छात्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की डॉ. बीआर आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में नई प्रवेश व्यवस्था लागू करने का मामला गरमा गया है। इस मसले पर जेएनयू प्रशासन और जेएनयू छात्र संघ आमने-सामने आ गए हैं। शुक्रवार सुबह सेंट्रल लाइब्रेरी के अंदर और बाहर जमकर हंगामा हुआ। विरोध कर रहे छात्रों ने लाइब्रेरी के प्रवेश द्वार के शीशे तोड़ दिए। हालात पर काबू पाने के लिए कैंपस में पुलिस बुलानी पड़ी। जिसके बाद छात्रों की ओर से पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
लाइब्रेरी के शीशे तोड़ने का वाीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार और अन्य छात्र गेट के शीशे तोड़ते दिख रहे हैं। वीडियो में सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकने का प्रयास करते दिख रहे हैं। प्रवेश द्वार का शीशा तोड़ने के दौरान छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश के दाएं पैर में चोट लग गई। वहीं प्रवेश व्यवस्था के विरोध सहित दूसरी मांगों को लेकर जेएनयू छात्र ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया है।
छात्र संघ अध्यक्ष बोले, अधिकारों का हनन होगा तो टूटेंगे ताले
इस मसले पर जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश ने कहा कि छात्रों के अधिकारों का हनन होने पर ताले टूटेंगे। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में अत्याधुनिक प्रवेश व्यवस्था के लिए मशीनें लगाई जा रही हैं। प्रवेश के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली से होकर छात्रों गुजरना होगा। छात्र मशीन नहीं लगाने सहित लाइब्रेरी में बुनियादी सुविधाओं को अपग्रेड करने को लेकर विरोध जता रहे थे। इस बीच दिल्ली पुलिस बुला ली गई। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरियन ने मुकदमा दर्ज कराने और करियर खत्म करने की धमकी दी है। इसी बीच लाइब्रेरी के प्रवेश और निकासी द्वार को बंद कर दिया गया। इस बीच यह घटना हो गई। नीतीश के दायें पैर में चोट आई है और दो टांके भी लगवाने पड़े है। उन्होंने कहा कि प्रवेश व्यवस्था को लेकर विरोध जारी रहेगा। छात्र संघ की 11 मांगों पर कुलगुरु, डीन और लाइब्रेरियन काम करें। इसमें प्रवेश व्यवस्था के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली को हटाने, लाइब्रेरी में बैठने के लिए सीट क्षमता को एक हजार करने, दिव्यांग छात्रों के लिए प्रवेश व्यवस्था को सुलभ बनाने सहित कई दूसरे कार्य है। उन्हेांने कार्यवाहक लाइब्रेरियन के इस्तीफे की मांग की है।
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प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं था मकसद : छात्रसंघ उपाध्यक्ष
जेएनयू छात्र संघ उपाध्यक्ष मनीषा ने कहा कि प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना मकसद नहीं था। मनीषा ने कहा कि लाइब्रेरी से छात्रों को बाहर आने नहीं दिया जा रहा था। बाहर पुलिस तैनात थी। ऐसे में कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में प्रवेश के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली को लेकर विरोध जारी रहेगा।
जातिसूचक और आपत्तिजनक शब्द लिखने का आया था मामला
इसी 18 अगस्त को जेएनयू की डॉ. बीआर आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी के रीडिंग रूम में टेबल पर जातिसूचक और आपत्तिजनक शब्द लिखने का मामला सामने आया था। इसमें जेएनयू के दो पूर्व/बाहरी छात्र दोषी मिले थे। जिसके बाद परिसर में उनके प्रवेश पर बैन लगा दिया गया था। लाइब्रेरी में अनाधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए प्रशासन अत्याधुनिक प्रवेश व्यवस्था बनाने में जुटा है।
छात्र संघ अध्यक्ष ने की गुंडागर्दी : लाइब्रेरियन
सेंट्रल लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन मनोरमा त्रिपाठी ने कहा कि जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार गुंडागर्दी कर रहे थे। उन्होंने बदतमीजी करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि घटनाक्रम सीसीटीवी फुटेज में कैद है। मनोरमा में छात्र संघ अध्यक्ष के आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया। साथ ही कहा कि लाइब्रेरी में फेस रिकग्निशन प्रणाली लगाने की मंजूरी लेने के बाद मशीनें लगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए पिछले तीन साल से प्रक्रिया चल रही थी। हाल में लाइब्रेरी में बाहरी छात्रों द्वारा आपत्तिजनक शब्द लिखने का मामला भी आया था। उन्होंने कहा कि रिकग्निशन प्रणाली पूरी तरह से सुरक्षित है। छात्र फॉर्म में भी तो फोटे देते है। ऐसे में व्यवस्था को लेकर विरोध दर्ज कराना गलत है। उन्होंने दावा किया कि 80 फीसदी छात्र इसके पक्ष में है। लाइब्रेरी में रीडिंग के लिए 900 लोगों की क्षमता है। वहीं पूरे मामले पर जेएनयू प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा उसको लेकर कुलगुरु कार्यालय से प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
फेस रिकग्निशन प्रणाली का विरोध गलत : वैभव
जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने लेफ्ट समर्थित छात्रों पर लाइब्रेरी में तोड़फोड़ और हिंसा का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर राजनीति की जा रही है। जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वैभव ने कहा कि बाहरी छात्रों के प्रवेश रोकने के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली को लागू किया जा रहा है। इसका विरोध करना पूरी तरह से गलत है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की डॉ. बीआर आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में नई प्रवेश व्यवस्था लागू करने का मामला गरमा गया है। इस मसले पर जेएनयू प्रशासन और जेएनयू छात्र संघ आमने-सामने आ गए हैं। शुक्रवार सुबह सेंट्रल लाइब्रेरी के अंदर और बाहर जमकर हंगामा हुआ। विरोध कर रहे छात्रों ने लाइब्रेरी के प्रवेश द्वार के शीशे तोड़ दिए। हालात पर काबू पाने के लिए कैंपस में पुलिस बुलानी पड़ी। जिसके बाद छात्रों की ओर से पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
लाइब्रेरी के शीशे तोड़ने का वाीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार और अन्य छात्र गेट के शीशे तोड़ते दिख रहे हैं। वीडियो में सुरक्षाकर्मी उन्हें रोकने का प्रयास करते दिख रहे हैं। प्रवेश द्वार का शीशा तोड़ने के दौरान छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश के दाएं पैर में चोट लग गई। वहीं प्रवेश व्यवस्था के विरोध सहित दूसरी मांगों को लेकर जेएनयू छात्र ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया है।
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छात्र संघ अध्यक्ष बोले, अधिकारों का हनन होगा तो टूटेंगे ताले
इस मसले पर जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश ने कहा कि छात्रों के अधिकारों का हनन होने पर ताले टूटेंगे। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में अत्याधुनिक प्रवेश व्यवस्था के लिए मशीनें लगाई जा रही हैं। प्रवेश के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली से होकर छात्रों गुजरना होगा। छात्र मशीन नहीं लगाने सहित लाइब्रेरी में बुनियादी सुविधाओं को अपग्रेड करने को लेकर विरोध जता रहे थे। इस बीच दिल्ली पुलिस बुला ली गई। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरियन ने मुकदमा दर्ज कराने और करियर खत्म करने की धमकी दी है। इसी बीच लाइब्रेरी के प्रवेश और निकासी द्वार को बंद कर दिया गया। इस बीच यह घटना हो गई। नीतीश के दायें पैर में चोट आई है और दो टांके भी लगवाने पड़े है। उन्होंने कहा कि प्रवेश व्यवस्था को लेकर विरोध जारी रहेगा। छात्र संघ की 11 मांगों पर कुलगुरु, डीन और लाइब्रेरियन काम करें। इसमें प्रवेश व्यवस्था के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली को हटाने, लाइब्रेरी में बैठने के लिए सीट क्षमता को एक हजार करने, दिव्यांग छात्रों के लिए प्रवेश व्यवस्था को सुलभ बनाने सहित कई दूसरे कार्य है। उन्हेांने कार्यवाहक लाइब्रेरियन के इस्तीफे की मांग की है।
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प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं था मकसद : छात्रसंघ उपाध्यक्ष
जेएनयू छात्र संघ उपाध्यक्ष मनीषा ने कहा कि प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना मकसद नहीं था। मनीषा ने कहा कि लाइब्रेरी से छात्रों को बाहर आने नहीं दिया जा रहा था। बाहर पुलिस तैनात थी। ऐसे में कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में प्रवेश के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली को लेकर विरोध जारी रहेगा।
जातिसूचक और आपत्तिजनक शब्द लिखने का आया था मामला
इसी 18 अगस्त को जेएनयू की डॉ. बीआर आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी के रीडिंग रूम में टेबल पर जातिसूचक और आपत्तिजनक शब्द लिखने का मामला सामने आया था। इसमें जेएनयू के दो पूर्व/बाहरी छात्र दोषी मिले थे। जिसके बाद परिसर में उनके प्रवेश पर बैन लगा दिया गया था। लाइब्रेरी में अनाधिकृत प्रवेश को रोकने के लिए प्रशासन अत्याधुनिक प्रवेश व्यवस्था बनाने में जुटा है।
छात्र संघ अध्यक्ष ने की गुंडागर्दी : लाइब्रेरियन
सेंट्रल लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन मनोरमा त्रिपाठी ने कहा कि जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार गुंडागर्दी कर रहे थे। उन्होंने बदतमीजी करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि घटनाक्रम सीसीटीवी फुटेज में कैद है। मनोरमा में छात्र संघ अध्यक्ष के आरोपों को पूरी तरह से गलत बताया। साथ ही कहा कि लाइब्रेरी में फेस रिकग्निशन प्रणाली लगाने की मंजूरी लेने के बाद मशीनें लगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इसके लिए पिछले तीन साल से प्रक्रिया चल रही थी। हाल में लाइब्रेरी में बाहरी छात्रों द्वारा आपत्तिजनक शब्द लिखने का मामला भी आया था। उन्होंने कहा कि रिकग्निशन प्रणाली पूरी तरह से सुरक्षित है। छात्र फॉर्म में भी तो फोटे देते है। ऐसे में व्यवस्था को लेकर विरोध दर्ज कराना गलत है। उन्होंने दावा किया कि 80 फीसदी छात्र इसके पक्ष में है। लाइब्रेरी में रीडिंग के लिए 900 लोगों की क्षमता है। वहीं पूरे मामले पर जेएनयू प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा उसको लेकर कुलगुरु कार्यालय से प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
फेस रिकग्निशन प्रणाली का विरोध गलत : वैभव
जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने लेफ्ट समर्थित छात्रों पर लाइब्रेरी में तोड़फोड़ और हिंसा का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर राजनीति की जा रही है। जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वैभव ने कहा कि बाहरी छात्रों के प्रवेश रोकने के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली को लागू किया जा रहा है। इसका विरोध करना पूरी तरह से गलत है।