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Delhi NCR News: चैंपियन दीदी की कप्तानी ने भाई को पहनाई टीम इंडिया की जर्सी
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- रोलर स्केटिंग में सपनों को विश्व मंच तक ले गई भाई-बहन की जोड़ी
काजल कुमारी
नई दिल्ली। एक ही घर से निकले दो सपने अब देश के खेल जगत में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। एक बहन ने एशियाई मंच पर भारत का नाम रोशन किया, तो अब छोटा भाई विश्व मंच पर तिरंगा लहराने की तैयारी में है। यह प्रेरणादायक कहानी रोलर स्केटिंग की प्रतिभाशाली भाई-बहन की जोड़ी हीरल और हिमनिश की है। राजीव गांधी स्टेडियम, बवाना से शुरू हुआ दोनों का सफर आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों तक पहुंच चुका है।
हीरल और हिमनिश ने छोटी उम्र से ही रोलर स्केटिंग को महज खेल नहीं, बल्कि अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। वर्षों की मेहनत, अनुशासन और नियमित अभ्यास ने हीरल को एशियन चैंपियन के रूप में पहचान दिलाई। वहीं, अपनी बड़ी बहन से प्रेरणा लेते हुए हिमनिश ने भी खेल की दुनिया में कदम रखा और लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए अब टीम इंडिया में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है।
इस भाई-बहन की जोड़ी की सबसे खास बात यह है कि दोनों एक-दूसरे के लिए प्रेरणा बनने के साथ मैदान पर भी एक-दूसरे की ताकत रहे हैं। एशियन चैंपियन हीरल अपने भाई हिमनिश के साथ अभ्यास करती रहीं और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करती रहीं। वर्ष 2014 में हिमनिश ने राजीव गांधी स्टेडियम, बवाना में कोच राहुल कौश के मार्गदर्शन में स्केटिंग की शुरुआत की। शुरुआती दौर में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
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हिमनिश ने सीबीएसई, एसजीएफआई और आरएसएफआई की कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। वर्ष 2021 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत और कांस्य पदक जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया और यूरोप में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर विश्वस्तरीय अनुभव हासिल किया।
अब हिमनिश की मेहनत को बड़ी उपलब्धि मिली है। उनका चयन वर्ल्ड स्केट गेम्स के जूनियर वर्ग में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है। इससे परिवार और खेल जगत में खुशी का माहौल है।
वहीं, वर्ष 2023 में हीरल ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह डबल वाइस यूरोपियन चैंपियन और कई बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं। विश्व रैंकिंग में उनका पांचवां स्थान है। हीरल की एशियाई सफलता और हिमनिश का विश्व मंच तक पहुंचना इस भाई-बहन की जोड़ी को खास बनाता है। एक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे की शान बढ़ाई, तो दूसरा अब उसी सपने को विश्व मंच पर आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
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काजल कुमारी
नई दिल्ली। एक ही घर से निकले दो सपने अब देश के खेल जगत में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। एक बहन ने एशियाई मंच पर भारत का नाम रोशन किया, तो अब छोटा भाई विश्व मंच पर तिरंगा लहराने की तैयारी में है। यह प्रेरणादायक कहानी रोलर स्केटिंग की प्रतिभाशाली भाई-बहन की जोड़ी हीरल और हिमनिश की है। राजीव गांधी स्टेडियम, बवाना से शुरू हुआ दोनों का सफर आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों तक पहुंच चुका है।
हीरल और हिमनिश ने छोटी उम्र से ही रोलर स्केटिंग को महज खेल नहीं, बल्कि अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। वर्षों की मेहनत, अनुशासन और नियमित अभ्यास ने हीरल को एशियन चैंपियन के रूप में पहचान दिलाई। वहीं, अपनी बड़ी बहन से प्रेरणा लेते हुए हिमनिश ने भी खेल की दुनिया में कदम रखा और लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए अब टीम इंडिया में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है।
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इस भाई-बहन की जोड़ी की सबसे खास बात यह है कि दोनों एक-दूसरे के लिए प्रेरणा बनने के साथ मैदान पर भी एक-दूसरे की ताकत रहे हैं। एशियन चैंपियन हीरल अपने भाई हिमनिश के साथ अभ्यास करती रहीं और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करती रहीं। वर्ष 2014 में हिमनिश ने राजीव गांधी स्टेडियम, बवाना में कोच राहुल कौश के मार्गदर्शन में स्केटिंग की शुरुआत की। शुरुआती दौर में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
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हिमनिश ने सीबीएसई, एसजीएफआई और आरएसएफआई की कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। वर्ष 2021 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत और कांस्य पदक जीतने के बाद उनका आत्मविश्वास और मजबूत हुआ। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन किया और यूरोप में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर विश्वस्तरीय अनुभव हासिल किया।
अब हिमनिश की मेहनत को बड़ी उपलब्धि मिली है। उनका चयन वर्ल्ड स्केट गेम्स के जूनियर वर्ग में टीम इंडिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए हुआ है। इससे परिवार और खेल जगत में खुशी का माहौल है।
वहीं, वर्ष 2023 में हीरल ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह डबल वाइस यूरोपियन चैंपियन और कई बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं। विश्व रैंकिंग में उनका पांचवां स्थान है। हीरल की एशियाई सफलता और हिमनिश का विश्व मंच तक पहुंचना इस भाई-बहन की जोड़ी को खास बनाता है। एक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे की शान बढ़ाई, तो दूसरा अब उसी सपने को विश्व मंच पर आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।