दिल्लीवासियों को बड़ी राहत!: अनधिकृत बस्तियां होंगी नियमित, 45 दिन में पूरी होगी प्रक्रिया, पढ़ें पूरी जानकारी
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि राजधानी के अनधिकृत कॉलोनी निवासियों के लिए सम्मान व अधिकार का नया अध्याय शुरू हुआ है। 1731 में से 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को 'जैसा है, जहां है' के आधार पर, बिना लेआउट प्लान की अनिवार्यता के नियमित किया जा रहा है।
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केंद्र सरकार ने दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा कर दी है। केंद्र सरकार की नई योजना में जहां है, जैसा है के तहत इन 1,511 कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा। इससे बिना तोड़-फोड़ के लोगों को उनके घरों का मालिकाना हक मिल सकेगा। मंगलवार को केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस योजना का एलान किया। साथ ही मेट्रो, रेलवे और नमो भारत स्टेशनों के आसपास किफायती घर बसाने के लिए ट्रांजिट ओरिएंटेड पॉलिसी-2026 भी जारी की।
कॉलोनियों को नियमित करने के फैसले से अनधिकृत बस्तियों के लगभग दस लाख परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। नए नियमों के तहत इन बस्तियों के लोगों को संपत्ति को पंजीकृत कराने के लिए ले आउट प्लान की जरूरत नहीं होगी। वहीं, सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि फैसले से 45 लाख से अधिक लोगों को लाभ होगा। कॉलोनियों को नियमित करने के केंद्र के इस फैसले के तहत आवेदन प्रक्रिया एमसीडी के स्वागम पोर्टल पर 24 अप्रैल से शुरू होगी। पीएम उदय पोर्टल पर भी आवेदन किया जा सकता है। मालिकाना हक देने की प्रक्रिया 45 दिन में पूरी हो जाएगी। आवेदन के पहले सात दिनों में इमारत का जीआईएस सर्वेक्षण होगा। 15 दिनों में मौजूद कमियां दूर कर बाकी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। दूसरी तरफ एमसीडी के नियम-कायदों को मानते हुए लोगों को अपने घरों का निर्माण या पुनर्निर्माण करने की भी इजाजत होगी।
- 1731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को अनुमोदित लेआउट प्लान की जरूरत नहीं होगी। अब इन्हें जहां है, जैसा है के आधार पर नियमित किया जाएगा। बाकी कॉलोनियों के लिए यह प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी। इन कॉलोनियों में सभी प्लॉटों और मकानों का भूमि उपयोग आवासीय माना जाएगा।
- 6 मीटर की सड़क होने पर 20 वर्ग मीटर तक के सुविधा स्टोर नियमित होंगे। दस वर्ग मीटर तक के स्टोर के सामने सड़क की चौड़ाई छह मीटर से कम हो सकती है। नियमितीकरण मौजूदा निर्मित संरचनाओं पर जैसा है, जहां है के आधार पर लागू होगा। मतलब अभी जिस तरह का मकान बना है, उसमें बिना बदलाव के उसे नियमित कर दिया जाएगा। इसमें अनुमोदित लेआउट प्लान बाधा नहीं बनेगा।
- एमसीडी समेत दूसरे स्थानीय निकाय नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करेंगे। खाली भूखंडों का सर्वेक्षण कर नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहायता करेंगे। दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग पात्र निवासियों को हस्तांतरण विलेख या अधिकार पर्ची जारी करेगा।
- आवेदक एमसीडी स्वगम पोर्टल ( https://mcdonline.nic.in/swagam ) पर लॉगइन करेंगे।
- अनधिकृत कॉलोनी का नाम चुनें; वार्ड और जोन स्वतः भर जाएंगे।
- क्या पीएम-यूडीएवाई केस आईडी मौजूद है (हां/नहीं)।
- यदि नहीं → पीएम-उदय पोर्टल पर जाएं।
- यदि हां → केस आईडी दर्ज करें:
- यदि कन्वेंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप जारी किया गया है → आवेदन पत्र खुल जाएगा।
- यदि जारी नहीं किया गया है → स्थिति जानने के लिए पीएम-उदय पोर्टल पर जाएं।
- दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग डीडीए के सहयोग से आवेदनों की प्रक्रिया और सीडी/एएस जारी करना।
- जारी की गई सीडी/एएस को स्वगम पोर्टल के माध्यम से एमसीडी को भेजा जाएगा।
पुनर्निर्माण और पुनर्विकास के लिए प्रावधान
पुनर्निर्माण या पुनर्विकास के मामलों में, सड़क की न्यूनतम चौड़ाई (6 मीटर आंतरिक सड़कें, 9 मीटर अप्रोच मार्ग) प्राप्त करने के लिए मार्ग के अधिकार में कमी के 50 प्रतिशत के बराबर भूमि को छोड़ना होगा। यदि मौजूदा एफएआर अनुमति सीमा से अधिक हो जाता है, तो दंडात्मक शुल्क (अतिरिक्त एफएआर शुल्क का 3 गुना) लागू होगा। डीडीए, एमसीडी और दिल्ली सरकार आपसी तालमेल कर उपग्रह चित्रों का उपयोग करके लेआउट योजनाएं तैयार करेगी। हालांकि, लेआउट प्लान न होने से नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगी।
सम्मान व अधिकार का नया अध्याय
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'राजधानी के अनधिकृत कॉलोनी निवासियों के लिए सम्मान व अधिकार का नया अध्याय शुरू हुआ है। 1731 में से 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को 'जैसा है, जहां है' के आधार पर, बिना लेआउट प्लान की अनिवार्यता के नियमित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली अनिश्चितता से निकलकर सम्मान, सुरक्षा और सुनियोजित विकास की राह पर तेज गति से आगे बढ़ रही है।'