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गरीबों, बच्चों के लिए पृथक-वास केंद्र के अनुरोध पर विचार करे केंद्र व दिल्ली सरकार: दिल्ली उच्च न्यायालय

Mon, 17 May 2021 01:31 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी पीटीआई, नई दिल्ली 
पीटीआई, नई दिल्ली  Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Mon, 17 May 2021 01:31 PM IST
सार

कोरोना के कारण गरीब लोगों और अनाथ हुए बच्चों को बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से इनकी ओर ध्यान देने के लिए कहा है और उचित कदम उठाने को लेकर निर्णय लेने के लिए कहा है।
 

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Center and Delhi government Consider the request of a separate housing center for the poor and children: Delhi High Court
गरीब - फोटो : pixabay

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र तथा दिल्ली सरकार से उस याचिका पर विचार करने केलिए कहा है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में गरीब तबके और बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में चिकित्सीय सुविधाओं से लैस पृथक-वास केंद्र बनाने की बात की गई है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के वक्त यह कहा। महात्मा हजारीलाल मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से भी समान विषय पर याचिका दायर की गई है।
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अदालत ने कहा कि न्यास के अनुरोध पर कानून, नियमों और मामले में लागू हो सकने वाली सरकारी नीति के आधार पर फैसला लिया जाएगा।

न्यास ने घर में पृथक-वास की वर्तमान नीति में संशोधन की मांग की है। उसने दावा किया है कि यह नीति ज्यादातर लोगों के लिए विफल साबित हो रही है क्योंकि परिवार के किसी सदस्य के कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर उसे अलग कमरे में रखने की व्यवस्था हर कोई नहीं कर सकता है।
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याचिका में कहा गया है कि घर में पृथक-वास की नीति के तहत संक्रमित व्यक्ति को अलग कमरे में रखना होता है और उस कमरे के साथ अलग शौचालय भी होना आवश्यक है ताकि संक्रमित व्यक्ति परिवार के अन्य सदस्यों से शारीरिक संपर्क में कम से कम आए। 

संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करने वाला भी कोई होना चाहिए। लेकिन असलियत में निम्न मध्यम वर्ग के कितने घरों में अलग शौचालय वाला अलग कमरा हो सकता है। यही वजह है कि परिवार के अन्य सदस्य भी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं और इससे शहर के अस्पतालों पर मरीजों का भार बढ़ता है।


इसमें बच्चों के लिए भी स्वास्थ्य प्रबंधन सुविधाएं तथा पृथक-वास केंद्रों की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि कई विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी की तीसरी लहर में बच्चे प्रभावित हो सकते हैं।
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