दिल्ली: 18 महीने के बजाय 12 माह के भीतर लगाए सीसीटीवी कैमरे
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हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एक साल के भीतर राजधानी के 44 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस 18 महीने के बजाय 12 माह के भीतर इन स्थानों पर कैमरे लगाएं।
हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को अंधेरे और कमजोर इलाकों को उजागर करने के मुद्दे पर स्टेटस रिपोर्ट दायर करने का निर्देश देते हुए इस मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी निर्धारित कर दी। कोर्ट16 दिसंबर 2012 को एक चलती बस में हुए दुष्कर्म मामले में शुरू हुई पीआईएल पर सुनवाई कर रही थी।
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को हाईकोर्ट को बताया कि शहर के दुर्घटना संभावित इलाकों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। ये कैमरे हाई-डेफिनेशन वीडियो रिकॉर्ड करेंगे और चेहरे की पहचान व वाहनों की नंबर प्लेट पहचान करना भी इनसे आसान होगा।
7 हजार कैमरे स्थापित करने में 18 महीने लगेंगे
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एजे भांबानी की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस से कैमरों की खरीद के लिए फ्लोटिंग टेंडर के लिए कदम उठाने और कैमरे लगाने वाली एजेंसियों से उन्हें लगवाने के लिए कहा है ताकि समय पर कैमरे लगाने का काम किया जा सके।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस को खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है। इससे पहले दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा और राजेश महाजन ने कोर्ट को बताया कि 44 कमजोर स्थानों में करीब 7 हजार कैमरे स्थापित करने में 18 महीने लगेंगे। इन उच्च तकनीकी कैमरों की खासियत के साथ उन्होंने इस पर 404 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी कोर्ट को दी।
सामाजिक कार्यकर्ता अजय गौतम ने भी याचिका दायर कर पुलिस स्टेशन में सीसीटीवी कैमरे उठाने के मुद्दे को उठाया है। इस पर पुलिस ने 111 पुलिस स्टेशनों में 15 जनवरी तक सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा होने का हलफनामा दायर किया था।