नाले में बच्ची की गिरने से हुई थी मौत, अब बिल्डरों पर होगी कार्रवाई
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इंदिरापुरम में दशहरे के दिन नाले में गिरकर बच्ची की मौत मामले में बिल्डरों की बढ़ी लापरवाही सामने आई है। जिस नाले में बच्ची की गिरकर मौत हुई, उसे बिल्डरों ने लेंटर डालकर पाट दिया है। बीच-बीच में कुछ जगह खुली रहने के कारण बच्ची उसमें गिर गई।
नाले पर लेंटर डला होने से फौरन बच्ची को निकाला नहीं जा सका। ऐसे में नाले को लेंटर से ढकने वाले बिल्डरों पर कार्रवाई होगी। कार्रवाई से पहले बिल्डरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
शुक्रवार को जीडीए उपाध्यक्ष कंचन वर्मा ने मामले के जांच अधिकारी मुख्य अभियंता के साथ इंदिरापुरम में मौके पर जाकर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान की नाले को बिल्डरों के लेंटर से पाट देने और बीच-बीच में लेंटर नहीं होने से नाला खुला होने की बात सामने आई।
जीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि नाले में बच्ची के गिरने के बाद लेंटर होने के कारण ही बच्ची को फौरन नहीं निकाला जा सका। एनडीआरएफ की टीम ने 14 घंटे के लंबे ऑपरेशन के बाद बच्ची का शव बरामद किया था।
ऐसे में नाले को अपनी सुविधा अनुसार लेंटर डालकर पाटने वाले बिल्डरों को पहले नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा। दोषी साबित होने पर उचित कार्रवाई भी की जाएगी। बता दें कि मामले में पहले जीडीए ओएसडी के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई थी।
लेकिन जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए जीडीए उपाध्यक्ष ने जीडीए मुख्य अभियंता और अपर सचिव के नेतृत्व में नई कमेटी गठित की। उन्होंने जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट में दोषियों के नामों को शामिल करने के निर्देश दिए। इसी के बाद बृहस्पतिवार को जीडीए उपाध्यक्ष ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
नाले से हटाए जाएंगे अवैध लेंटर
इंदिरापुरम में जिस नाले में गिरने से बच्ची की मौत हुई, उसके नाले पर अवैध रूप से बिल्डरों की ओर से डाले गए लेंटरोंको हटाकर नालों को ओपन किया जाएगा। भविष्य में हादसे की संभावना को खत्म करने के उद्देश्य जीडीए उपाध्यक्ष ने नालों से अवैध लेंटर हटाने के निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण में यह बात सामने आई कि नाले में गिरने के बाद बच्ची थोड़ी आगे तक बह गई। नाले पर लेंटर डला होने के कारण ही बच्ची को फौरन बाहर नहीं निकाला जा सका। इसी कारण उसकी मौत हो गई।
नाला निर्माण का सत्यापन करने वाले अफसरों पर लटकी है तलवार
इंदिरापुरम में नाला निर्माण के साथ वहां सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। नाले के निर्माण में ठेकेदार के काम का सत्यापन करने वाले जेई और एई पर भी गाज गिर सकती है। प्राधिकरण की ओर से नाला निर्माण के वक्त तैनात अधिकारियों की सूची तलब की गई है। जांच में निर्माण संबंधी खामी उजागर होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।