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Delhi NCR News: अदालत पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले वकील के खिलाफ मामला बंद
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- बिना शर्त माफी मांगने के बाद न्यायमूर्ति ने मामले को किया बंद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही को बंद कर दिया है। आरोपी वकील ने अदालत में यह इशारा किया था कि अभियोजक अदालत को नियंत्रित करता है, न कि न्यायाधीश। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने वकील द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के बाद मामला बंद करने का फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने मौखिक माफी मांगी है। उसे सुनने और समग्र तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उसकी बिना शर्त माफी को स्वीकार किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप अवमानना की कार्यवाही बंद करने का निर्देश दिया जाता है। मामला तब शुरू हुआ जब वकील ने दिल्ली की एक अदालत के समक्ष यह इशारा किया कि अभियोजक अदालत पर नियंत्रण रखता है, न कि अध्यक्षीय न्यायाधीश। एडिशनल सेशंस जज ने हाईकोर्ट को अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए संदर्भ भेजा।
हाईकोर्ट में पेश होकर मांगी माफी
अवमानना संदर्भ मिलने पर हाईकोर्ट ने आरोपी वकील को नोटिस जारी किया। उसके बाद वकील हाईकोर्ट के समक्ष शारीरिक रूप से उपस्थित हुआ और बिना शर्त माफी मांगी। उसने कहा कि 12 वर्षों की अपनी प्रैक्टिस में उसने कभी अदालत का अनादर नहीं किया। उसने कहा कि उसकी कानूनी प्रैक्टिस उसके और उसके पूरे परिवार के लिए एकमात्र आजीविका का स्रोत है। कोर्ट ने उसकी माफी स्वीकार कर ली और मामला बंद कर दिया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही को बंद कर दिया है। आरोपी वकील ने अदालत में यह इशारा किया था कि अभियोजक अदालत को नियंत्रित करता है, न कि न्यायाधीश। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने वकील द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के बाद मामला बंद करने का फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने मौखिक माफी मांगी है। उसे सुनने और समग्र तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उसकी बिना शर्त माफी को स्वीकार किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप अवमानना की कार्यवाही बंद करने का निर्देश दिया जाता है। मामला तब शुरू हुआ जब वकील ने दिल्ली की एक अदालत के समक्ष यह इशारा किया कि अभियोजक अदालत पर नियंत्रण रखता है, न कि अध्यक्षीय न्यायाधीश। एडिशनल सेशंस जज ने हाईकोर्ट को अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए संदर्भ भेजा।
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हाईकोर्ट में पेश होकर मांगी माफी
अवमानना संदर्भ मिलने पर हाईकोर्ट ने आरोपी वकील को नोटिस जारी किया। उसके बाद वकील हाईकोर्ट के समक्ष शारीरिक रूप से उपस्थित हुआ और बिना शर्त माफी मांगी। उसने कहा कि 12 वर्षों की अपनी प्रैक्टिस में उसने कभी अदालत का अनादर नहीं किया। उसने कहा कि उसकी कानूनी प्रैक्टिस उसके और उसके पूरे परिवार के लिए एकमात्र आजीविका का स्रोत है। कोर्ट ने उसकी माफी स्वीकार कर ली और मामला बंद कर दिया।
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