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यमुना में नहीं गिरेगा सीवरेज: गंदगी गिराने पर लगेगा जुर्माना, दिल्ली की यमुना में गिरते हैं 30 नाले

Tue, 18 Feb 2025 09:16 AM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Tue, 18 Feb 2025 09:16 AM IST
सार

दिल्ली के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन चौधरी का कहना है कि तीन सालों के अंदर नदी को साफ किया जाएगा। दिल्ली में यमुना का 57 किलोमीटर का हिस्सा है। यह हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करती है और उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंच जाती है

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By December 2026, all the sewage treatment plants built in Delhi will be started.
यमुना सफाई अभियान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जनवरी 2027 से यमुना में सीवरेज का गंदा पानी नहीं गिरेगा। दिसंबर 2026 तक दिल्ली में बनाए गए सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू कर दिए जाएंगे। इनकी मदद से यमुना को साफ करने में मदद मिलेगी।
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दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक के बाद इस दिशा में काम शुरू हो गया है। इसके तहत यमुना में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवाह को पूरी तरह से रोकने के लिए शहर के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों को पूरी तरह कार्यात्मक बना देगी। दिल्ली में छह नए प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनकी मदद से दिसंबर 2027 तक यमुना को साफ कर दिया जाएगा। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के दौरान दावा किया था कि प्रदूषण से ग्रस्त यमुना को साफ किया जाएगा।
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दिल्ली के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन चौधरी का कहना है कि तीन सालों के अंदर नदी को साफ किया जाएगा। दिल्ली में यमुना का 57 किलोमीटर का हिस्सा है। यह हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करती है और उत्तर प्रदेश की सीमा तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि नदी से ठोस अपशिष्ट, जलकुंभी और खरपतवार को हटाने के लिए सात मशीनें लगाई गई हैं। यह काम अगले कुछ महीनों तक चलेगा।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली में लगभग एक दर्जन एसटीपी का आधुनिकीकरण किया जाना है। 2026 के अंत तक छह ऐसे संयंत्रों का निर्माण पूरा करना है। दिसंबर 2026 तक सभी एसटीपी पूरी तरह कार्यात्मक हो जाएंगे। उसके बाद यमुना में कोई अनुपचारित सीवेज गिराया गया पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नदी में औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवाह को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिसके लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और उद्योग विभाग मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में (सीईटीपी) ठीक से काम कर रहे हैं। लोगों को मूर्तियों को विसर्जित करने, कैलेंडर आदि वस्तुओं को नदी में फेंकने से रोकने के लिए जागरूकता पैदा की जाएगी।  


यमुना में गिरते हैं  30 नाले
यमुना में करीब 28 से 30 बड़े नाले अनुपचारित अपशिष्ट जल डालते हैं। सबसे बड़े नाले नजफगढ़ और बारापुला नाले हैं। इन नालों में कई छोटे नाले मिलते हैं जो अनुपचारित पानी को नदी में ले जाते हैं। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) भी फल्ड नालों के माध्यम से सीवेज के प्रवाह को रोकने के लिए काम कर रहा है।
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