फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Buraris infamous house is inhabited again in delhi

बुराड़ी का 'चर्चित घर' फिर हुआ आबाद, नए मालिक ने कहा नहीं हूं अंधविश्वासी

Mon, 30 Dec 2019 03:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 30 Dec 2019 03:35 AM IST
विज्ञापन
Buraris infamous house is inhabited again in delhi
आबाद हुआ आशियान - फोटो : ANI

पिछले साल 11 लोगों की आत्महत्या के बाद डर, रहस्य और अंधविश्वास के कारण खाली हुआ बुराड़ी का चर्चित घर एक बार फिर से आबाद हो गया है। 

विज्ञापन


इस घर में एक परिवार आन बसा है। घर के मालिक डॉ. मोहन सिंह का कहना है  कि मुझे कोई समस्या नहीं है और यह सुविधाजनक है क्योंकि यह घर सड़क के नजदीक है। वे कहते हैं कि मैं अंधविश्वासी नहीं हूं। 
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन



दरअसल, बुराड़ी में एक साथ 11 लोगों के सामूहिक आत्महत्या कांड के बाद घर पर ऐसा दाग लगा कि लोग उसके सामने से गुजरने से भी कतराने लगे। वारदात के बाद से न तो कोई इस मकान को खरीदने के लिए तैयार था और न ही कोई इसे किराए पर लेना चाहता था। मोहन सिंह कश्यप ने दिनेश सिंह चूंडावत के मकान को 25 हजार रुपये महीना किराए पर लिया है। 

मूल रूप से उत्तराखंड के रुद्रपुर के रहने वाले मोहन सिंह का परिवार फिलहाल उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में रहता था। इनके परिवार में पत्नी कृष्णा देवी, 11 और 5 साल की दो बेटियां, 8 साल का बेटा और भाई सोनू (26) हैं। 

कई साल से मोहन सिंह बुराड़ी इलाके में ध्रुव पैथोलॉजी के नाम से अपनी लैब चलाते हैं। उनके तीनों बच्चे बुराड़ी के नालंदा पब्लिक स्कूल में पढ़ते हैं। मोहन सिंह का कहना है कि वह किसी अंधविश्वास को नहीं मानते।

उन्होंने बताया कि नवंबर माह में उन्होंने मकान देखा और उसे लेने का मन बना लिया। हालांकि, कई लोगों ने उनसे मकान नहीं लेने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने और उनके परिवार ने मन बना लिया था। 


मोहन का कहना है कि उनके बच्चे इस मकान से पहले से परिचित हैं। उनके बच्चे ललित की बहन प्रतिभा की बेटी प्रियंका से ट्यूशन पढ़ने जाते थे। 11 लोगों की आत्महत्या के बाद पुलिस ने कई माह तक जांच के लिए मकान को सील करके रखा। 

बाद में इकलौते बचे वारिस ललित और भूपी के भाई दिनेश सिंह चूंडावत को मकान सौंप दिया गया। इसके बाद से ही दिनेश मकान को बेचने या किराए पर देने के प्रयास कर रहे थे, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। मशक्कत के बाद अब डेढ़ साल में पहली बार दिनेश को किराएदार मिला है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed