‘जब हम फंदे पर लटकेंगे तो भगवान के दर्शन होंगे और भगवान हम सबको बचा लेंगे...।’ अब तक की पुलिस की जांच की मानें तो कुछ इसी अंधविश्वास ने पूरे भाटिया परिवार को मौत के मुंह में धकेल दिया।
ये लाइन तो नहीं 11 मौतों की वजह- 'फंदे पर लटकेंगे तो भगवान के दर्शन होंगे और वो हम सबको बचा लेंगे'
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जिस दिन घर में क्रिया हो, उस दिन घर में कुछ नहीं बनाना चाहिए
पुलिस के मुताबिक, भाटिया परिवार के घर में बने छोटे से मंदिर के अंदर मिले रजिस्टर में ये बातें लिखी हुई मिलीं। रजिस्टर से पता चलता है कि भाटिया परिवार बुरी तरह अंधविश्वास के फेर में फंसा था। यह बात पूरी तरह साफ है कि परिवार किसी न किसी बाबा के चक्कर में फंसा था। उसकी बताई हुई क्रिया के अनुसार ही परिवार ने अंधविश्वास में अपनी जान दे दीं। अब पुलिस इन सबके पीछे मौजूद बाबा का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
ललित और उसकी पत्नी ने बांधे सबके हाथ...!
रजिस्टर में लिखी क्रिया के अनुसार, पूजा के लिए मंगलवार, बृहस्पतिवार के अलावा शनिवार या रविवार का दिन ही चुना जाना चाहिए। क्रिया करने से पूर्व लगातार सात दिन तक पूजा करना भी जरूरी है। क्रिया रात 12 से एक बजे के बीच ही होनी चाहिए। जिस दिन घर में क्रिया हो, उस दिन घर में कुछ नहीं बनाना चाहिए। बेब्बे सबको हाथों से रोटी खिलाएंगी। क्रिया के लिए जरूरी है कि सबकी सोच उस समय एक जैसी हो।
पूजा के लिए मध्यम रोशनी होनी चाहिए। क्रिया को दृढ़ता के साथ करना है। क्रिया करते-करते तुम्हारे काम दृढ़ता से शुरू हो जाएंगे। मन शून्य में चला जाना चाहिए। वट वृक्ष की पूजा का भी जिक्र है। किसी भी तरह की अड़चन से बचने के लिए कानों का बंद होना भी जरूरी है। इसलिए कानों में रुई डालकर बंद किया जाना चाहिए। आंखों को अच्छी तरह से बांधना है। सूती रस्सियों के साथ सूती चुन्नियों या साड़ी का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। पट्टियां अच्छी तरह से बंधी होनी चाहिए। पट्टियां यदि बच जाएं तो उन्हें आंखों पर डबल कर लेना है।
मुंह को भी पट्टियों के अलावा रुमाल से बांध लेना है। जितनी दृढ़ता और श्रद्धा दिखाओगे, उतना ही अचित फल मिलेगा। घर की दोनों विधवा महिलाओं नारायण देवी और प्रतिभा को अलग-अलग साधना करनी है। बेब्बे ज्यादा देर खड़ी नहीं रह सकती हैं, इसलिए उन्हें अपने कमरे में ही क्रिया में शामिल होना है। क्रिया के दौरान मोबाइल फोन को भी अपने से दूर रखना है।