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Delhi NCR News: संस्कृत के साधकों का सम्मान जरूरी, युवा पीढ़ी को जोड़ने पर दिया जोर
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। वसंतकुंज स्थित वेदव्यास गुरुकुलम् में रविवार को अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन और वेदव्यास गुरुकुलम् के संयुक्त तत्वावधान में वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। समारोह में संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों और युवा आचार्यों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी के परमाध्यक्ष श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी महाराज का सान्निध्य रहा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी मुख्य अतिथि और दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर विशिष्ट अतिथि रहे। अध्यक्षता प्रो. रमेशकुमार पाण्डेय ने की।
स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ ने कहा कि विद्या और विद्वानों का सम्मान करना सभी का दायित्व है। विद्वान का सम्मान भगवान का सम्मान है। युवा विद्वानों का सम्मान भारतीय ज्ञान परंपरा और ऋषि संस्कृति का सम्मान है।प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि संस्कृत के उत्सव तभी सार्थक होंगे, जब संस्कृत के साथ उसके साधकों और आचार्यों का भी सम्मान हो। जहां विद्वान सम्मानित होते हैं, वहां शास्त्र सुरक्षित रहते हैं और संस्कृति जीवित रहती है। उन्होंने युवा पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
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समारोह में डॉ. रंजन कुमार त्रिपाठी और डॉ. मनीषा उपेन्द्र कोठेकर को एक-एक लाख रुपये तथा डॉ. यशवन्त कुमार त्रिवेदी और डॉ. अनमोल शर्मा को 51-51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
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नई दिल्ली। वसंतकुंज स्थित वेदव्यास गुरुकुलम् में रविवार को अखिल भारतीय संस्कृत साहित्य सम्मेलन और वेदव्यास गुरुकुलम् के संयुक्त तत्वावधान में वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। समारोह में संस्कृत, भारतीय ज्ञान परंपरा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों और युवा आचार्यों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी के परमाध्यक्ष श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामी महाराज का सान्निध्य रहा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी मुख्य अतिथि और दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर विशिष्ट अतिथि रहे। अध्यक्षता प्रो. रमेशकुमार पाण्डेय ने की।
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स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ ने कहा कि विद्या और विद्वानों का सम्मान करना सभी का दायित्व है। विद्वान का सम्मान भगवान का सम्मान है। युवा विद्वानों का सम्मान भारतीय ज्ञान परंपरा और ऋषि संस्कृति का सम्मान है।प्रो. वरखेड़ी ने कहा कि संस्कृत के उत्सव तभी सार्थक होंगे, जब संस्कृत के साथ उसके साधकों और आचार्यों का भी सम्मान हो। जहां विद्वान सम्मानित होते हैं, वहां शास्त्र सुरक्षित रहते हैं और संस्कृति जीवित रहती है। उन्होंने युवा पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
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समारोह में डॉ. रंजन कुमार त्रिपाठी और डॉ. मनीषा उपेन्द्र कोठेकर को एक-एक लाख रुपये तथा डॉ. यशवन्त कुमार त्रिवेदी और डॉ. अनमोल शर्मा को 51-51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।