जिस कट्टे से की गई इंस्पेक्टर सुबोध और सुमित की हत्या, उसका बड़ा बाजार है बुलंदशहर
बुलंदशहर की घटना में मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और छात्र सुमित की मौत .32 कैलिबर की गोली से हुई। अब इसके बाद एक बार फिर .32 बोर का कट्टा चर्चा में आ गया है। अगर लाइसेंसी .32 बोर पिस्टल की बात करें तो यह आर्म्स फैक्ट्री से निर्मित होती है।
यह भारत सरकार द्वारा पंजीकृत हैं। जबकि .32 बोर के कट्टे तो पश्चिमी यूपी में खुलेआम बिक रहा है। बुलंदशहर में भी इसका बड़ा बाजार है। .32 का कट्टा बुलंदशहर, एटा, इटावा, मैनपुरी, बुलंदशहर, कानुपर, में सबसे प्रचलित स्थानीय हथियार है। इसकी कीमत बाजार में 25 से चालीस हजार रुपये तक होती है।
वहीं जबकि आर्म्स फैक्ट्री से निर्मित लाइसेंसी पिस्टल या रिवाल्वर की कीमत एक लाख रुपये से अधिक की होती है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि .32 बोर का तमंचा बहुत प्रचलित है। यह स्थानीय स्तर पर कारीगर बना लेते हैं।
इस पर मेड इन यूएसए लिखकर बेचते हैं। इसकी फैक्ट्रियां कई जगहों पर चलती है। हाल के दिनों में .32 की स्टारमेड नामक कट्टे की डिमांड बढ़ी है। यह पाकिस्तान निर्मित कट्टा होता है। जो नेपाल के रास्ते भारत में सप्लाई की जाती है। बाजार में नकली .32 बोर की रिवाल्वर व पिस्टल भी मिलने की बात आ रही है।
किसकी गोली से हुई मौत
जानकार मानते हैं कि इंस्पेक्टर व युवक की मौत .32 बोर के हथियार से हुई है। यह हथियार किसी का लाइसेंसी हैं या नकली, इसका अभी पता नहीं चल पाया है। बात यह भी चली कि इंस्पेक्टर के पास भी निजी लाइसेंस रिवाल्वर थी। वह घटना के बाद से ही गायब है। किस हथियार से गोली चली, इसका खुलासा तभी होगा जब हथियार मिलने के बाद उसकी जांच होगी।
.32 बोर आम नागरिकों के लिए है
जानकार बताते हैं कि पुलिस के पास .38 बोर के हथियार होते हैं। आम लोगों के लिए यह हथियार प्रतिबंधित होता है। जो लोग लाइसेंस बनवाते हैं, उन्हें .32 बोर की पिस्टल या रिवाल्वर ले सकते हैं। पिस्टल कोलकाता की आर्डिनेंस फैक्टरी जबकि रिवाल्वर कानपुर की आर्डिनेंस फैक्टरी में बनती है। इसके अलावा जिनके पास आर्म्स दुकान का लाइसेंस होता है, वहां से भी खरीदा जा सकता है।
पुलिस निजी हथियार भी ले जा सकती
जानकारों ने बताया कि अगर किसी के पास लाइसेंसी निजी हथियार है तो वह ड्यूटी के वक्त अपने पास रख सकता है। चूंकि शुरू में यह बात उठी कि इंस्पेक्टर के पास निजी लाइसेंसी रिवाल्वर थी, वह घटना के बाद से गायब है। रिटायर्ड डीएसपी केके गौतम का कहना है कि आत्म सुरक्षा के लिए ही लाइसेंस ली जाती है। चाहे पुलिस कर्मी हो या आम आदमी, वह अपने पास रख सकता है।