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Delhi NCR News: पंजाब के लिए ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को सात मामलों में जमानत
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पंजाब में साल 2016-17 के दौरान हुई लक्षित हत्याओं (टारगेट किलिंग्स) और हत्या के प्रयास से जुड़े सात मामलों में ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को जमानत दे दी। इनमें यूएपीए के तहत दर्ज मामले भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की पीठ ने शुक्रवार को जोहल की सातों जमानत अपीलों पर यह आदेश दिया। जोहल को साल 2017 में पंजाब से गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, यह मामले लुधियाना और जालंधर में हुई लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयास से जुड़े हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) की बड़ी साजिश थी। एनआईए ने जोहल पर साजिश में वित्तीय मदद और पैसे पहुंचाने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता, यूएपीए और शस्त्र अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। जोहल की जमानत अर्जियां पहले एनआईए की विशेष अदालत ने खारिज कर दी थीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सितंबर 2024 में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को मामलों पर नए सिरे से विचार के लिए इन्हें हाईकोर्ट भेज दिया था।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने पंजाब में साल 2016-17 के दौरान हुई लक्षित हत्याओं (टारगेट किलिंग्स) और हत्या के प्रयास से जुड़े सात मामलों में ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को जमानत दे दी। इनमें यूएपीए के तहत दर्ज मामले भी शामिल हैं। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दुडेजा की पीठ ने शुक्रवार को जोहल की सातों जमानत अपीलों पर यह आदेश दिया। जोहल को साल 2017 में पंजाब से गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार, यह मामले लुधियाना और जालंधर में हुई लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयास से जुड़े हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) की बड़ी साजिश थी। एनआईए ने जोहल पर साजिश में वित्तीय मदद और पैसे पहुंचाने वाले व्यक्ति की भूमिका निभाने का आरोप लगाया है। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता, यूएपीए और शस्त्र अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। जोहल की जमानत अर्जियां पहले एनआईए की विशेष अदालत ने खारिज कर दी थीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सितंबर 2024 में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को मामलों पर नए सिरे से विचार के लिए इन्हें हाईकोर्ट भेज दिया था।
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