नारों के बीच दबी एंबुलेंस की आवाज, मासूम ने गंवाई जान
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सिपाही भर्ती बोर्ड में धांधली के विरोध में शनिवार सुबह एनएच-91 पर छात्रों का जाम एक बच्चे की मौत का कारण बन गया।
बुलंदशहर के प्रियांश (7) को गाजियाबाद के अस्पताल में एडमिट कराने जा रही एंबुलेंस दो किलोमीटर लंबे जाम में करीब 40 मिनट फंसी रही। पुलिस अधिकारियों के समझाने पर ही जाम खुला।
इधर, एंबुलेंस के देर से अस्पताल पहुंचने के कारण बच्चे की मौत हो गई। सादौपुर की झाल पर शनिवार सुबह छात्रों ने एनएच-91 पर जाम लगा दिया।
नारों के बीच दांव पर लगी मासूम की जिंदगी
नाराज छात्रों ने सरकार के पुलिस भर्ती बोर्ड पर धांधली का आरोप लगाया। जाम में एक एंबुलेंस भी फंस गई। इसमें बुलंदशहर निवासी प्रदीप तिवारी अपने 7 साल के बेटे को गाजियाबाद के अस्पताल में भर्ती कराने के लिए जा रहे थे।
बताया गया है कि कुछ दिन पहले घर के बाहर एक बाइक सवार ने प्रियांश को टक्कर मार दी थी। उसके सिर में चोट आई थी। उसे बुलंदशहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
शुक्रवार रात प्रियांश को दौरे पड़ने लगे, जिसके बाद डॉक्टरों ने प्रियांश को गाजियाबाद ले जाने की सलाह परिजनों को दी।
भीड़ ने नहीं सुनी मां की गुहार
इधर, जाम की सूचना पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
इस दौरान प्रियांश की मां आरती एंबुलेंस को जाम से निकलवाने की गुहार लगाती रही, लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। बाद में तहसीलदार प्रवीण कुमार और सीओ अनुराग सिंह मौके पर पहुंचे।
उन्होंने मांग को शासन स्तर पर भेजने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। एंबुलेंस को किसी तरह निकाला गया, लेकिन तब तक करीब 40 मिनट बीत चुके थे। अस्पताल पहुंचने पर बच्चे की मौत हो गई। उधर, छात्रों ने तीन घंटे तक जाम लगाए रखा।
क्यों लगाया जाम
2014 में उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही भर्ती के लिए टेस्ट देने वाले सैकड़ों छात्र शनिवार को सादोपुर की झाल पर एकत्र हुए। छात्रों का आरोप है कि पुलिस भर्ती बोर्ड ने भर्ती में बडे़ स्तर पर धांधली की।
मेरिट के अलावा भी बड़ी संख्या में अयोग्य आवेदकों का चयन किया गया। उनका कहना है कि 320 नंबर प्राप्त करने वाले योग्य अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड डाउनलोड नहीं हो रहे हैं, जबकि 273 नंबर प्राप्त करने वाले आवेदकों के एडमिट कार्ड डाउनलोड हो रहे हैं।