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Delhi: केंद्र के अस्पतालों में शुरू होगी बोन मैरो प्रत्यारोपण की सुविधा, सफदरजंग में हुआ पहला ट्रांसप्लांट
Tue, 22 Aug 2023 12:53 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 22 Aug 2023 12:53 AM IST
सार
निजी अस्पतालों में इसके लिए करीब 10-15 लाख रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि सफदरजंग अस्पताल में काफी कम खर्च पर सुविधा मिल जाती है।
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सफदरजंग अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली में चल रहे केंद्र सरकार के अस्पतालों में जल्द ही बोन मैरो प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होगी। अभी यह सुविधा एम्स और सफदरजंग अस्पताल में है। सफदरजंग अस्पताल ने तीन दिन पहले ही पहला प्रत्यारोपण किया।
इस बारे में अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वंदना तलवार ने कहा कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट को इसी साल जून में शुरू किया गया था। इस यूनिट के प्रभारी डॉ. कौशल कालरा सहित डॉ. सुमिता चौधरी, डॉ. पीएस भाटिया, डॉ. मुकेश नागर, डॉ. अंकुर और डॉ. अदिति व अन्य सेवाएं दे रहे रहें हैं।
डॉ. तलवार ने कहा कि केंद्र के अस्पतालों में सफदरजंग इस सुविधा को शुरू करने वाला पहला अस्पताल है। स्वास्थ्य विभाग अन्य अस्पतालों में भी इसे शुरू करने का प्रयास कर रहा है। यह सुविधा मल्टीपल मायलोमा, लिम्फोमा और अन्य हेमेटोलॉजिकल मैलिग्नेंसी वाले रोगियों के लिए एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है।
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निजी अस्पतालों में इसके लिए करीब 10-15 लाख रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि सफदरजंग अस्पताल में काफी कम खर्च पर सुविधा मिल जाती है। डॉ. कालरा ने बताया कि बीते दिनों मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित 45 वर्षीय महिला का पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।
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इस बारे में अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वंदना तलवार ने कहा कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट को इसी साल जून में शुरू किया गया था। इस यूनिट के प्रभारी डॉ. कौशल कालरा सहित डॉ. सुमिता चौधरी, डॉ. पीएस भाटिया, डॉ. मुकेश नागर, डॉ. अंकुर और डॉ. अदिति व अन्य सेवाएं दे रहे रहें हैं।
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डॉ. तलवार ने कहा कि केंद्र के अस्पतालों में सफदरजंग इस सुविधा को शुरू करने वाला पहला अस्पताल है। स्वास्थ्य विभाग अन्य अस्पतालों में भी इसे शुरू करने का प्रयास कर रहा है। यह सुविधा मल्टीपल मायलोमा, लिम्फोमा और अन्य हेमेटोलॉजिकल मैलिग्नेंसी वाले रोगियों के लिए एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है।
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निजी अस्पतालों में इसके लिए करीब 10-15 लाख रुपये खर्च करना पड़ता है, जबकि सफदरजंग अस्पताल में काफी कम खर्च पर सुविधा मिल जाती है। डॉ. कालरा ने बताया कि बीते दिनों मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित 45 वर्षीय महिला का पहला ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया।