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नीली बत्ती की कार से ‘पुलिस अफसर’ बनकर करते थे अपराध
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Tue, 05 Jan 2016 06:16 AM IST
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कासना पुलिस ने पुलिस की वर्दी पहनकर नीली बत्ती लगी कार से वाहन चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। दो चोर गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 20 बाइक, नीली बत्ती लगी कार और चोरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए। गिरोह दिल्ली-एनसीआर में करीब 2500 वाहन चोरी कर चुका है।
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कोतवाली प्रभारी अनिल प्रताप सिंह ने बताया कि सोमवार को सूचना मिली कि बदमाश वारदात करने के फिराक में घूम रहे हैं। पुलिस ने सेक्टर-चाई 4 के पास से दो लोगों को पकड़ लिया। पूछताछ में वह चोर निकले। दोनों मैनपुरी जिला के रहने वाले हैं। इसमें रामकुमार उर्फ रामू कुरसंडा गांव और सुशील उर्फ सुनील वाथम नंदरेला गांव का रहने वाला है।
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दोनों पर मैनपुरी और गौतमबुद्ध नगर जिले के थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। चोर पहले भी कई बार जेल जा चुके। गिरोह का मुख्य सरगना वीपी उर्फ विजय पाल यादव फरार है। पुलिस की वर्दी पहनकर और कार पर नीली बत्ती लगाकर गिरोह चोरी करने निकलता था।
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दिल्ली- एनसीआर में करते थे चोरी
पुलिस पूछताछ में चोरों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, रोहतक समेत दिल्ली एनसीआर के अलग-अलग क्षेत्रों से ढाई हजार वाहन चोरी किए। वाहनों के लॉक को मास्टर चाबी से खोलते थे। नहीं खुलने पर उसे तोड़ देते थे। गियर लॉक और टायर लॉक काटने के लिए कटर का इस्तेमाल करते थे। जरूरत पड़ने पर टायर पंचर कर देते थे। इसके बाद वाहनों को मैनपुरी, इटावा, एटा, अलीगंज समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाकर 5 से 15 हजार रुपये में बेच देते थे।
गिरोह पर है एक नेता का हाथ
पकड़े गए चोरों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गिरोह पर मैनपुरी के एक पार्टी के किसी बड़े नेता का हाथ है। बताया जा रहा है कि नेता रसूख के दम पर चोरी करने के लिए बढ़ावा देता है। उसी के संरक्षण में गिरोह चल रहा है।
इस तरह देते थे चकमा
पुलिस को चकमा देकर चोर निकल जाते थे। पूछताछ में बताया कि जब कहीं चेकिंग चल रही होती थी तो उनका दूसरा साथी पुलिस कर्मियों से कार में पुलिस अधिकारी के बैठे होने की बात कहकर बचकर निकल जाते थे।
बंद घरों में ठिकाने लगाते थे चोरी के वाहन
पुलिस पूछताछ में पता चला कि गिरोह कम आबादी वाले सेक्टरों में बंद मकानों में चोरी के वाहन ठिकाने लगाते थे। जिस घर में कोई आता जाता नही था उसी मकान में वाहनों को चोरी कर ले जाकर छिपा देते थे। बेचने के लिए सौदा होने पर वाहन निकाल लेते थे। यह कई बार यमुना एक्सप्रेसवे से आते जाते रहे है।