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मां का शव ले रोती रहीं बहने, भाई को न आई दया

Thu, 07 May 2015 02:16 PM IST
Updated Thu, 07 May 2015 02:16 PM IST
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body of mother has taken sisters but brother not open the door

मां के शव को लेकर चार बेटी भाई के दरवाजे पर करीब तीन घंटे तक रोती रही और भाई से अंतिम संस्कार की गुहार लगाती रही लेकिन कलयुगी भाई ने मरी हुई मां का चेहरा देखना और अंतिम संस्कार करना तो दूर अपने घर का गेट तक नहीं खोला।

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सेक्टर के लोगों तथा पुलिस ने भी प्रयास कर लिया लेकिन व्यक्ति ने किसी की भी नहीं मानी। आखिरकार चारों बेटी ही अपनी मां को सफीपुर स्थित श्मशान घाट लेकर गई और वहां पर उन्होंने मां को मुखाग्नि दी।
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घटना गामा-दो सेक्टर में बुधवार को हुई। हालांकि किसी की ओर से कोई शिकायत पुलिस को नहीं दी गई है।जानकारी के मुताबिक हरियाणा जींद निवासी एक व्यक्ति गामा-दो सेक्टर में रहते हैं।
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कुछ साल पहले हुआ था बहनों से विवाद

body of mother has taken sisters but brother not open the door

कुछ साल पहले उनका अपनी बहनों से विवाद हो गया था और उसी के चलते अपनी मां रतनमाला से भी मनमुटाव हो गया। करीब एक साल पहले मां बीमार हुई तो भी उसने डॉक्टरों को दिखाना मुनासिब नहीं समझा।


बेटियों को मां की तबियत के बारे में पता चला तो वह भाई के घर आई लेकिन न तो भाई ने बात की और न ही मां को अस्पताल ले जाने के लिए कहा।

भाई के मन को देखकर चारों बहने मां को दिल्ली ले गई और वहीं पर इलाज कराया मगर लंबे इलाज के बाद भी उनकी मां ठीक नहीं हुई और बुधवार तड़के उन्होंने दम तोड़ दिया।

पुलिस के कहने पर भी बेटे का कलेजा नहीं पसीजा

body of mother has taken sisters but brother not open the door

चारों बहनों ने सोचा कि मां के मरने के बाद तो भाई का कलेजा पसीज ही जाएगा इसलिए शव को भैया के पास ही ले चलो। चारों बहनें कार से मां को भाई के घर गामा-दो सेक्टर ले आईं।


उन्होंने गेट की घंटी बजाई तो भाई आया लेकिन बहन और मां के शव को कार में देखकर उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया। बहनें रोते हुए भाई को मनाने का प्रयास कर रही थी और बस यह कह रही थी कि आखिरी बार मां को उनका अधिकार दे दो।

वह अपने बेटे के हाथ से मुक्ति पा जाए लेकिन बेटे ने एक बार भी बहनों की पुकार न सुनी। इस बात की सूचना पुलिस को मिली तो मौके पर पहुंची और व्यक्ति से अपनी मां का अंतिम संस्कार कराने की अपील की लेकिन उन्होंने पुलिस की भी न मानी। पुलिस के कहने पर रतनमाला की बेटियां गुंजलता, मीरा, राशि और रश्मि  ने ही उनका अंतिम संस्कार किया।

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