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Delhi : प्रदूषक नैनो पार्टिकल के आगे बेबस हुआ शरीर, शोध में खुलासा- हर अंग हो रहा है घायल

Mon, 02 Dec 2024 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Dec 2024 05:35 AM IST
सार

यह फेफड़ों के रास्ते खून में पहुंच कर हर अंग को घायल कर रहा है। मौजूदा समय में इनके कारण बच्चों में उच्च रक्तचाप के साथ मधुमेह का स्तर बढ़ता हुआ दिख रहा है। इसका पता लंग्स केयर फाउंडेशन से जुड़े पल्मोनरी विभाग के विशेषज्ञों के शोध में हुआ। 

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Body helpless in front of pollutant nano particles
Delhi pollution: Delhi की हवा और खराब, प्रदूषण से जनता कर रही त्राहिमाम! | Amar Ujala | - फोटो : self

विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में बढ़े वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में मौजूद प्रदूषक नैनो पार्टिकल के आगे शरीर  बेबस है। यह फेफड़ों के रास्ते खून में पहुंच कर हर अंग को घायल कर रहा है। मौजूदा समय में इनके कारण बच्चों में उच्च रक्तचाप के साथ मधुमेह का स्तर बढ़ता हुआ दिख रहा है। इसका पता लंग्स केयर फाउंडेशन से जुड़े पल्मोनरी विभाग के विशेषज्ञों के शोध में हुआ। 

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विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में नवंबर से जनवरी तक पीएम 2.5 का स्तर मानक से कई गुना अधिक रहता है। इनमें प्रदूषक नैनो पार्टिकल का स्तर काफी ज्यादा होता है। इन्हें एन 95 मास्क भी रोक नहीं पाता। यह सीधे फेफड़ों से होते हुए खून की धमनियों में जमा हो जाता है जो उच्च रक्तचाप का कारण बनता है। इसके अलावा देखा गया है कि यें कण पैनक्रिया तक भी पहुंच रहे हैं जिस कारण इंसुलिन कम रिलीज होता है। जो मधुमेह के लिए जिम्मेदार हैं।  
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एम्स के पूर्व प्रोफेसर व फाउंडेशन के संस्थापक प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि शोध में पाया गया कि प्रदूषण के कारण प्री मैच्योर बच्चे में हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) हो रहा है। हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) धमनियों में जमा होकर खून के बहाव में बाधा उत्पन्न करता है। इससे पूरी प्रक्रिया बाधित होती है और धीरे-धीरे रक्तचाप की समस्या बनती है। ठीक इसी तरह से देखा गया है कि यही प्रदूषक पैंक्रियाज में पहुंचकर यहां जमा होने लगते हैं। ऐसा होने पर इंसुलिन रिलीज होने की प्रक्रिया बाधित हो जाती है जो मधुमेह का कारण बनता है। 
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चलाया जाएगा जागरूकता अभियान 
प्रदूषण से होने वाली समस्याओं को दूर करने के लिए बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस को लेकर एक अभियान चलाया जा रहा है। इसमें कोशिश है कि लोग समस्या के इलाज की जगह रोकथाम पर काम करें। प्रदूषण से होने वाली समस्या का इलाज से ज्यादा बेहतर विकल्प बचाव है। 


दिल-दिमाग पर पड़ रहा गंभीर असर 
प्रदूषण के कारण दिल, दिमाग सहित दूसरे अंगों पर गंभीर असर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण और ठंड के कारण इन दिनों दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक के मामले भी बढ़ गए हैं। इसके अलावा लंग्स कैंसर, फेफड़ों में एलर्जी, अस्थमा, सीओपीडी, टीबी, मोटापा, लकवा, बच्चों में निमोनिया, बच्चों में कैंसर सहित दूसरे गंभीर रोग होने की आशंका रहती है।
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