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हाईकमान का शह-मात का खेल या गुर्जर वोटरों में सेंध

Tue, 03 Feb 2015 12:17 AM IST
Updated Tue, 03 Feb 2015 12:17 AM IST
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BJP looks gujjar voters to Awtar Singh Bhadana

हरियाणा व देश की राजनीति में गुर्जर मतदाताओं के बीच धमक रखने वाले फरीदाबाद के सांसद कृष्ण पाल गुर्जर व पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना के अब एक मंच पर आ जाने पर भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच ही खलबली है।

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भड़ाना के भाजपा में आने को लेकर आलाकमान की क्या रणनीति है इसको दोनों गुर्जर नेताओं के समर्थक समझ नहीं पा रहे हैं। संभव है कि अब कृष्ण पाल गुर्जर को अपने क्षेत्र के समर्थकों के बीच अपनों से ही जूझना पड़ेगा।
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में अवतार सिंह भड़ाना ने कृष्ण पाल से कड़ी हार मिलने के बाद अक्तूबर 2014 में इनेलो का दामन थाम लिया था। चर्चा यह भी है कि व्यावसायिक दृष्टिकोण के चलते भी सत्ता से ज्यादा समय तक दूर न रहने वाले भड़ाना ने भाजपा में एंट्री का रास्ता खोज ही लिया।
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हरियाणा, एनसीआर व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य भाजपा गुर्जर नेता भी इसको लेकर सकते में हैं कि आलाकमान ने ऐसा निर्णय लेकर शह व मात का खेल खेला है या यह चुनावी वैतरणी पार करने का पैंतरा है।

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BJP looks gujjar voters to Awtar Singh Bhadana

दरअसल, दिल्ली खासकर हरियाणा की सीमा से जुड़ी करीब एक दर्जन सीटों के अलावा 2017 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटाें पर परचम फहराने के लिए भी भड़ाना का प्रयोग किया जाएगा। कृष्ण पाल को दिल्ली फतह करने के अभियान में गुर्जर बाहुल्य सीटों पर आलाकमान ने पहले से ही यहां लगाया हुआ है।

जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जरों का भी भड़ाना को समर्थन मिलता रहा है। वर्ष 1999 से लेकर वर्ष 2009 तक उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर तीन लोकसभा चुनाव जीते। हालांकि वर्ष 1999 में उन्हें मेरठ लोकसभा सीट से उतारा गया और कांग्रेस का यूपी में वजूद न होने के बावजूद गुर्जरों में अच्छी पैठ रखने वाले भड़ाना ने यहां से सीट निकाल ली।

2004 व 2009 का चुनाव वे फरीदाबाद से जीते तो वर्ष 2014 के चुनाव में पहली बार भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण पाल गुर्जर ने उन्हें बुरी तरह हराया। भड़ाना की हार के बाद हरियाणा की राजनीति में गुर्जरों के बीच कृष्णपाल गुर्जर का कद बढ़ा गया और मोदी सरकार ने इसका इनाम उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जगह दे कर दिया। हालांकि मंत्री बनने के कुछ ही दिनों में राष्ट्रीय राजमार्ग व जहाजरानी मंत्रालय बदले जाने से आलाकमान से उनकी नाराजगी की बातें भी सामने आईं।

ऐसे में जाहिर है कि पंद्रह सालों से हरियाणा की राजनीति में धमक रखने वाले भड़ाना के भाजपा में आने के बाद कृष्ण पाल को अपने क्षेत्र व समाज में वर्चस्व बनाए रखने को लेकर अपनों से ही जूझना होगा।

बताया जाता है कि कांग्रेस में अवतार सिंह भड़ाना के वरिष्ठ साथी रहे पूर्व कांग्रेसी नेता और अब मोदी सरकार में मंत्री बीरेंद्र सिंह के माध्यम से ही उनकी भाजपा में एंट्री हुई।
 
दिल्ली में कहां कितने गुर्जर मतदाता
छतरपुर-53 प्रतिशत, तुगलकाबाद 14 प्रतिशत, कस्तूरबा नगर 28 प्रतिशत, जंगपुरा 28 प्रतिशत, करावल नगर 10 प्रतिशत, ओखला 15 प्रतिशत, बदरपुर 10 प्रतिशत, कालकाजी 9 प्रतिशत, घोंडा 9 प्रतिशत, बुराड़ी 8 प्रतिशत, त्रिलोकपुरी 6 प्रतिशत।

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