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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Bisahdha: disabled mother can not control her tears when she asked about his sons

दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज अपाहिज मां फफक-फफक कर रो पड़ी

Sat, 02 Apr 2016 03:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Sat, 02 Apr 2016 03:45 AM IST
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Bisahdha: disabled mother can not control her tears when she asked about his sons
आरोपी की अपाहिज मां लीला - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

मेरे दोनों बेटे किसी तरह मेरा इलाज करा रहे थे। परिवार के लोगों को दो जून की रोटी मुहैया कराने के लिए जी तोड़ मेहनत करते थे। घर की माली हालत को देखते हुए दिन में मजदूरी और रात में कंपनी में ड्यूटी करते थे।

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जिस दिन इकलाख के साथ घटना हुई थी उस दिन तो उनका एक बेटा घर में उसके पास था और दूसरा बेटा ड्यूटी पर गया था। मगर मेरे दोनों बेटों को हत्या में फंसा दिया। यह बात कहते-कहते श्रीओम और हरिओम की बुजुर्ग और अपाहिज मां लीला फफक कर रो पड़ी।
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उसका कहना है कि आज उनके घर के लोग दो-दो रोटियों के लिए भी मोहताज है। वह स्वयं अपाहिज है और श्रीओम की गिरफ्तारी होने के बाद से उसकी पत्नी की हालत भी ठीक नहीं है। वह उसी दिन से बीमार है और श्रीओम का नाम ही रटती रहती है।

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घर में न तो खाने को है और न ही बहू को अस्पताल ले जाने के लिए एक रुपया

Bisahdha: disabled mother can not control her tears when she asked about his sons
छावनी बना बिसाहड़ा - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

वहीं, हरिओम की पत्नी इस समय गर्भवती है और कभी भी प्रसव पीड़ा हो सकती है। मगर घर में न तो खाने को है और न ही बहू को अस्पताल ले जाने के लिए एक रुपया है।

रोते-बिलखते हुए हाथ जोड़कर कह रही थी कि गांव के कुछ लोगों और कुछ बाहरी लोग ही चावल, आटा तथा दाल-मसाले आदि पहुंचा रहे हैं। जिससे घर के लोगों को रोटी मिल पा रही है।

जिले के अफसर उनके घर आते हैं और हालचाल पूछकर चले जाते हैं मगर अभी तक किसी ने मदद के नाम पर कुछ नहीं किया है। वह बस यही कह रही थी कि उसके दोनों बेटों को किसी तरह छुड़वा दिया जाए।

इकलाख के घर के उग आई दो फुट ऊंची घास

Bisahdha: disabled mother can not control her tears when she asked about his sons
दादरी

इकलाख, जमील और अफजाल के घरों पर ताला लगा हुआ है। जिस गली से वह लोग आते-जाते थे उस गली में डेढ़ से दो फुट ऊंची घास दिखने लगी है। जिससे साफ पता चलता है कि 20 नवंबर के बाद से वहां पर इकलाख के परिवार के लोग गांव नहीं गए हैं।

तीनों भाईयों के घर पर ताला लगा होने के कारण उनके समुदाय के लोग भी उधर जाने से परहेज करते हैं। हालांकि बिसाहड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि इकलाख या उनके परिवार के कोई भी सदस्य गांव में बिना किसी डर के रह सकते हैं।

जो घटना हुई है उसके लिए सभी को पछतावा है मगर उसे वापस नहीं लाया जा सकता है। इकलाख की मौत का जितना दुख उनके परिवार को है उतना ही दुख गांव के लोगों को भी है। राशनडीलर के मुताबिक गांव में 5 अप्रैल को राशन लाया जाएगा और उसके बाद बांटना शुरू कर दिया जाएगा। यदि ग्रामीण राशन का वितरण होने देंगे तो ठीक है अगर विरोध होता है तो बांटना बंद कर दिया जाएगा।

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