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CG: नगरीय निकाय चुनाव में मेयर पद के आरक्षण से संबंधित याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज, जानें पूरा मामला
Mon, 03 Feb 2025 09:07 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Mon, 03 Feb 2025 09:07 PM IST
सार
नगरीय निकाय चुनाव में मेयर पद के आरक्षण में मनमानी, अनियमितता के आरोप लगाते हुए दायर याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि संपूर्ण अधिसूचना में अवैधता या अनियमितता नहीं है।
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बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नगरीय निकाय चुनाव में मेयर पद के आरक्षण में मनमानी, अनियमितता के आरोप लगाते हुए दायर याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। जस्टिस बिभू दत्त गुरु के कोर्ट ने सोमवार को सभी पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि संपूर्ण अधिसूचना में अवैधता या अनियमितता नहीं है। यह निष्पक्ष एवं उचित है। इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि वैसे भी चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। सभी याचिकाओं को निराधार होने के कारण खारिज कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा 15 जनवरी 2025 को आरक्षण के संबन्ध में अधिसूचना जारी की थी, जिसमें आरक्षण और अन्य प्रावधान किए गए थे। एवज देवांगन, डोमेश सहित अन्य ने प्रदेश के सभी नगर निगम में मेयर पद के आरक्षण में प्रक्रिया का पालन नहीं करने और अनियमितता का आरोप लगया था।
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याचिका में अधिसूचना की संपूर्ण कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में महापौर पद के आरक्षण को मनमाना अनुचित, भेदभावपूर्ण, अनाधिकृत और अवैध होने की बात कही गई। संविधान के अनुच्छेद 243 में सीटों का आरक्षण निर्धारित है। 2011 की जनगणना के अनुसार ही नगर निगमों में मेयर का पद चार श्रेणियों ओबीसी, ओबीसी महिला, अनारक्षित एवं अनारक्षित महिला वर्ग के लिए होना चाहिए।
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राज्य की ओर से जवाब प्रस्तुत कर कहा गया कि याचिकाकर्ता की शिकायत पूरी तरह से गलत है। याचिका में भ्रमपूर्ण जानकारी दी गई है। अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को उनकी जनसंख्या के अनुपात के आधार पर आरक्षण दिया जाएगा । अधिकतम 50 प्रतिशत सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित होंगी। महिला एसटी, महिला एससी और ओबीसी महिला के लिए क्षैतिज आरक्षण लाटरी निकालकर एवं प्रक्रिया अपनाकर नेताओं की उपस्थिति में किया गया है।