विश्व ट्रामा दिवस: जान प्यारी है तो हेलमेट लगाएं, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में सबसे ज्यादा बाइकर्स
सड़क दुर्घटना में घायल करीब 20 हजार मामले दोपहिया वाहन, साइकिल और पैदल चलने वाले के होते हैं। इन दोपहिया से जुड़े अधिकतर मामलों में चालक ने हेलमेट नहीं पहनना होता है।
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दोपहिया वाहनों चालकों को सड़क पर सुरक्षित चलना है तो हेलमेट पहनें। एम्स ट्रामा सेंटर में दोपहिया वाहन से घायल होकर पहुंच रहे अधिकतर लोगों के सिर में गंभीर चोट लगती है जो मौत का कारण बन जाता है। एम्स ट्रामा सेंटर में हर साल करीब 75 हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से 35 से 40 हजार मरीज सड़क दुर्घटना में घायल होकर पहुंचते हैं।
सड़क दुर्घटना में घायल करीब 20 हजार मामले दोपहिया वाहन, साइकिल और पैदल चलने वाले के होते हैं। इन दोपहिया से जुड़े अधिकतर मामलों में चालक ने हेलमेट नहीं पहनना होता है। वहीं, अन्य तरह की सड़क दुर्घटना के मामले में कार दुर्घटना, बस, ट्रैक्टर सहित अन्य से जुड़े होते हैं। वहीं, अन्य मामलों में ऊंचाई से गिरना, अपराध, आत्महत्या, कृषि उपकरण, रेलवे ट्रैक सहित अन्य से जुड़ा हुआ है।
इस बारे में एम्स ट्रामा सेंटर के प्रोफेसर डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि कि एक अध्ययन में पाया गया था कि करीब 40 फीसदी लोग हेलमेट ही नहीं लगाते। ट्रामा सेंटर में ऐसे कई मरीज आए हैं जिन्हें हेलमेट न लगाने के कारण सिर में गंभीर चोट लगी। ऐसे मरीजों की मौत तक हो जाती है। उन्होंने कहा कि हेलमेट लगाने से काफी हद तक मरीज सुरक्षित हो जाता है। वहीं अन्य डॉक्टरों ने बताया कि मजबूत हेलमेट को नियम के तहत लगाना चाहिए।
40-45 फीसदी लोग नहीं लगाते हेलमेट
एम्स ट्रामा सेंटर के प्रोफेसर डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि एम्स ट्रामा सेंटर ने एक अध्ययन किया था। इसमें पाया गया कि दोपहिया वाहन चलाने वाले 40-45 फीसदी लोग ही हेलमेट नहीं पहनते। वहीं, दोपहिया के पीछे बैठने वाले करीब 75 फीसदी लोग हेलमेट का इस्तेमाल नहीं करते। अध्ययन के दौरान ट्रामा में आए मरीजों का डाटा एकत्रित किया गया। इसमें पता चला कि करीब 56 फीसदी दोपहिया चालक हेलमेट लगाते हैं। वहीं पीछे बैठने वाले करीब 25 फीसदी लोग हेलमेट लगाते हैं।
ट्रामा सेंटर में मामले
- हर साल आने वाले मामले - करीब 75 हजार
- सड़क दुर्घटना के मामले - करीब 40 हजार
- अन्य मामले - करीब 35 हजार
बढ़ रहे रोड रेज के मामले
दिल्ली में रोडरेज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एम्स ट्रामा सेंटर में आने वाले केस में बीते कुछ साल से बढ़त दर्ज की जा रही है। डॉक्टरों की माने तो इस साल आने वाले केस का अध्ययन किया जा रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि किस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। एम्स ट्रामा सेंटर में रोजाना चाकूबाजी, सड़क पर गंभीर रूप से मारपीट सहित अन्य के मामले आ रहे हैं।
दिल्ली के फुटपाथ की भी सुरक्षित नहीं
दिल्ली के फुटपाथ पर चलने वाले लोग भी सुरक्षित नहीं है। एम्स ट्रामा सेंटर में आने वाले केस में बड़ी संख्या पैदल चलने वालों की है। इन्हें दूसरे वाहनों ने पैदल चलते हुए घायल किया है। इसमें काफी लोग फुटपाथ पर चलते हुए घायल हुए जिन्हें दूसरे वाहन ने घायल किया। बता दें कि दिल्ली के फुटपाथ को सुरक्षित बनाने का आदेश दिया गया है। हालांकि, अतिक्रमण के कारण अधिकतर जगहों पर फुटपाथ पर चलने के लिए जगह ही नहीं है। वहीं, कई जगहों पर फुटपाथ पर ही लोग गाड़ियां चलाते हुए पाए जाते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में साइकिल वाले भी घायल होकर ट्रामा सेंटर पहुंचते हैं। बता दें कि दिल्ली सरकार ने साइकिलिंग को सुरक्षित बनाने के लिए ट्रेक बनाए थे, लेकिन अधिकतर जगहों पर यह चालू हालत में नहीं है। वहीं सड़कों पर साइकिल चलाना सुरक्षित नहीं है।
अन्य मामलों में शामिल केस
- ऊंचाई से गिरना
- हिंसा या अपराध
- आत्महत्या
- रेलवे ट्रैक पर घायल
- कृषि उपकरण से घायल होना
- अन्य तरह से घायल
बचाव के लिए करें
- हेलमेट पहनना
- गाड़ी की सीट बेल्ट लगाना
- गाड़ी की स्पीड लिमिट रखना
- शराब पीकर गाड़ी चलाने से बचना
- गाड़ी चलाने समय मोबाइल का इस्तेमाल न करना