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वैक्सीन मैन: बिबकोल की शुरुआत से हर प्रोजेक्ट को लीड करते रहे चंद्र वल्लभ, पढ़िए बेंजी गांव से बिबकोल तक का पूरा सफर

Tue, 15 Jun 2021 06:30 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 15 Jun 2021 06:30 PM IST
सार

चोला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बिबकोल (भारत इम्यूनोलाजिकल्स एंड बायोलाजिकल्स कारपोरेशन लिमिटेड) को भारत सरकार ने वर्ष 1989 में स्थापित किया था। इस दौरान सबसे पहले कंपनी को पोलियो वैक्सीन बनाने का जिम्मा दिया गया था।

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bibcol vice president chandra vallabh benjwal dies of black fungus know all about him
चंद्र वल्लभ बेंजवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग बेंजी गांव के मूल निवासी और कोरोना वैक्सीन बनाने की तैयारी कर रही कंपनी बिबकोल के वाइस प्रेसिडेंट के निधन से न सिर्फ उनकी कंपनी, उनके गांव बल्कि कोरोना से लड़ाई के अभियान को भी तगड़ा झटका लगा है। वैक्सीन मैन के नाम से मशहूर बिबकोल के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट चंद्र वल्लभ बेंजवाल की मौत के बाद कर्मचारियों में शोक का माहौल है। बताया जा रहा है कि कंपनी की स्थापना के बाद से चंद्र वल्लभ बेंजवाल ही प्रत्येक प्रोजेक्ट को लीड करते थे। सोमवार को चोला स्थित बिककोल कंपनी में उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

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1989 से ही रहे सभी प्रोजेक्ट के हेड
चोला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बिबकोल (भारत इम्यूनोलाजिकल्स एंड बायोलाजिकल्स कारपोरेशन लिमिटेड) को भारत सरकार ने वर्ष 1989 में स्थापित किया था। इस दौरान सबसे पहले कंपनी को पोलियो वैक्सीन बनाने का जिम्मा दिया गया था। प्रतिवर्ष करीब 160 करोड़ डोज बनाने वाली कंपनी को अब सरकार ने कोरोना वैक्सीन बनाने का जिम्मा दिया गया था।
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यह भी पढ़ें : उत्तराखंड: 'वैक्सीन मैन' का गांव में बसने का सपना रह गया अधूरा, कोरोना वैक्सीन बनाने में निभाई थी अहम भूमिका
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प्रतिमाह करीब डेढ़ करोड़ डोज बनाने के लिए सरकार ने 30 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था। वैक्सीन प्रोडक्शन के लिए लैब बनाने की तैयारियां चल रहीं थी, लेकिन कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट चंद्र वल्लभ बेंजवाल की मौत ने कंपनी के पदाधिकारियों व स्टाफ को गहरा आघात दिया है। अब वैक्सीन के निर्माण पर भी असर पड़ सकता है।

बिबकॉल के एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि चंद्र वल्लभ बेंजवाल का स्वभाव सबके साथ मित्रवत था। कोई भी अपनी परेशानी लेकर उनके पास जाता था तो वह समाधाान के लिए तैयार रहते थे। उन्हें कभी किसी ने नाराज होते नहीं देखा था। 

सपना था रिटायरमेंट के बाद गांव में बसने का
रिटायरमेंट के बाद बेंजवाल का सपना था कि वह अपने पैतृक गांव बेंजी में शेष जीवन व्यतीत करें। बीते वर्ष लॉकडाउन के दौरान उन्होंने पैतृक मकान की मरम्मत भी करा ली थी। लेकिन, उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई। 

चंद्र वल्लभ बेंजवाल के पिता के पिता पुरुषोत्तम बेंजवाल के पांच बच्चों में चंद्र बल्लभ बेंजवाल सबसे बड़े थे। उन्होंने स्वामी सच्चिदानंद राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग से 1981 में हाईस्कूल व 1983 में इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। इसके बाद पीजी कॉलेज गोपेश्वर में उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की। बीएससी के बाद वर्ष 1988 में कानपुर एचबीआईटी से बीटेक में गोल्ड मेडल प्राप्त किया। आईआईटी मद्रास से आईआईटी की पढ़ाई के बाद उनकी नियुक्ति भारत इम्यूनोलॉजिकल एंड बायोलॉजिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीआईबीसीओएल) में हुई।

विलक्षण थी उनकी प्रतिभा
साथी बताते हैं कि वह किसी भी मुश्किल से घबराते नहीं थे और हर समस्या का हल ढूंढ ही लेते थे। उनके मार्ग दर्शन में बिबकोल बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनके साथियों का मानना है कि बेंजवाल के जाने से उनकी कंपनी पर असर जरूर पड़ेगा, हालांकि उनकी ही प्रेरणा से कंपनी के लोग आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

जानें क्या बोले चिकित्सक

हमने एक ही वर्ष में कंपनी को ज्वाइन किया था। इस दौरान वह हमेशा बड़े भाई की तरह व्यवहार करते थे। साथ ही सभी प्रोजेक्ट को लीड करते हुए पूरा भार अपने कंधों पर लेते थे। कर्मचारियों के लिए वह हमेशा से विनम्र रहते थे। चंद्र वल्लभ बेंजवाल की मौत से कंपनी का पूरा स्टाफ शोक में है।- सुनील कुमार शर्मा, एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट, बिबकॉल

चंद्र वल्लभ बेंजवाल का असमय हमारे बीच से जाना एक बड़ा आघात है। कोरोना को हराने में वह अपनी भूमिका निभाने वाले थे। कोरोना ने देश को हजारों ऐसे जख्म दिए हैं, जिन्हें आसानी से नहीं भुलाया जा सकेगा। फिर भी देश कोरोना को हराएगा।- डॉ. वीरेंद्र कुमार, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

विभिन्न महामारियों से हराने में चंद्रवल्लभ बेंजवाल का अहम योगदान रहा है। जितना योगदान चिकित्सक महामारी को हराने में देते हैं, उतना ही योगदान साइंटिस्ट और वैक्सीन निर्माण से जुड़े लोग देते हैं। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। - डॉ. संजीव अग्रवाल, सचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन

चंद्रवल्लभ बेंजवाल का असमय जाना चिकित्सीय समाज के लिए बड़ी क्षति है। महामारी से लड़ने के लिए चंद्रवल्लभ बेंजवाल एक नींव तैयार कर रहे थे, लेकिन वह खुद ही इसकी चपेट में आ गए। भगवान उनके परिवार को दुख की इस घड़ी को सहने की शक्ति दे। उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।- डॉ. संजीव यादव, पूर्व सचिव, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
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