आपदा को अवसर में बदलाः प्लास्टिक के कचरे से बना डाली टी शर्ट और पीपीई किट
फेसबुक के साथ अमर उजाला ने कोरोना सेनानियों के जज्बे और जुनून पर यह श्रृंखला शुरू की है। इसके तहत आपको साहसी कोरोना सेनानियों की कथाएं नियमित रूप से पढ़ने को मिलेंगी।
फरीदाबाद के सेक्टर-21ए निवासी भव्य चावला ने मन के जज्बे से आपदा को अवसर में बदला। कोरोना महामारी में जहां अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी हुई है, वहीं नए-नए प्रयोग कर भव्य ने कबाड़ में फेंकी जाने वाली प्लाटिक बोतलों से टी-शर्ट, पीपीई किट, फेस शील्ड, मॉस्क और दस्ताने बनाने शुरू कर दिए। इस प्रयोग से लॉकडाउन के दौरान भी जहां भव्य ने अपने करीब 100 कर्मचारियों को रोजगार मुहैया कराया, वहीं उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल भी पेश की।
यूं जगा पर्यावरण प्रेम
भव्य चावला की फैक्टरी बुल्ट नेचुरल डॉट कॉम का कॉरपोरेट दफ्तर फरीदाबाद के सेक्टर-11 में है। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही कुछ अलग करना चाहते थे। विशेषकर दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण को लेकर वह चिंतित थे। 2017 में दिल्ली के आईआईएलएम से बीबीए की पढ़ाई पूरी की।
एक बार दोस्तों के साथ नैनीताल घूमने के लिए गया था। वहां एक नदी दूर से देखने पर बहुत सुंदर दिख रही थी। जब नदी के पास पहुंचे तो उसमें पानी की बोतलों को अंबार लगा हुआ था। यह देखकर पर्यावरण प्रेम जगा। प्लास्टिक की बोतलों को रिसाइकल करने की स्टडी के लिए अमेरिका गए। पता चला कि अमेरिका, यूरोप, जापान, सिंगापुर में कई ऐसी कंपनियां है जो प्लास्टिक बोतलों को रिसाइकल कर उनसे कपड़े बनाती हैं।
लॉकडाउन में बने सहारा
भव्य बताते हैं कि अमेरिका से लौटने के बाद उन्होंने परिजनों की मदद से नोएडा और लुधियाना में अपनी फैक्टरी लगाई। उनकी कंपनी स्पोर्ट्स वेयर तैयार करती है। प्लास्टिक की बेकार बोतलों से इस कंपनी में टी-शर्ट के साथ ही लोअर, रनिंग शार्ट्स, जैकेट और ट्रैक सूट व अन्य सामान बनाए जाते हैं। अपनी फैक्ट्री को संचालित किया और करीब 100 श्रमिकों को लॉकडाउन के दौरान भी नियमित रोजगार उपलब्ध कराया।
(फेसबुक ने इस शृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)