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Delhi NCR News: मातृत्व के अनकहे अनुभवों को मंच पर जीवंत करता ‘बेली ऑफ द बीस्ट’
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-कमानी ऑडिटोरियम में दूसरे दिन भी दर्शकों ने कल्कि कोचलिन और शीना खालिद के नाटक को सराहा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कमानी ऑडिटोरियम में आद्यम थिएटर की प्रस्तुति ‘बेली ऑफ द बीस्ट’ का दूसरा और अंतिम शो दर्शकों की जोरदार तालियों के बीच संपन्न हुआ। कल्कि कोचलिन और शीना खालिद द्वारा लिखित तथा शीना खालिद के निर्देशन में तैयार यह नाटक ‘द एलिफेंट इन द वॉम्ब’ पर आधारित है। इसकी कहानी मातृत्व के विभिन्न चरणों से गुजर रही पांच महिलाओं के अनुभवों को मिथकीय प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत करती है।
ड्रैगन, यूनिकॉर्न, स्पाइडर डेमन, वैम्पायर और वेयरवुल्फ जैसे रूपकों के जरिए भय, प्रेम, थकान, असुरक्षा और आत्मबल जैसी भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से उभारा गया। शैडो पपेट्री, लाइव संगीत और मूवमेंट ने प्रस्तुति को और सशक्त बनाया। अनुरूपा रॉय की छाया-कठपुतली और गाय हर्शबर्ग के संगीत ने मंचन में नई ऊंचाई जोड़ी। कल्कि कोचलिन सहित पूरी कलाकार मंडली के अभिनय को खूब सराहना मिली। कल्कि ने कहा कि नाटक मातृत्व के संघर्ष और बदलाव की वास्तविक यात्रा को सामने लाता है, जबकि शीना खालिद ने इसे अपनी सोच बदलने वाला अनुभव बताया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कमानी ऑडिटोरियम में आद्यम थिएटर की प्रस्तुति ‘बेली ऑफ द बीस्ट’ का दूसरा और अंतिम शो दर्शकों की जोरदार तालियों के बीच संपन्न हुआ। कल्कि कोचलिन और शीना खालिद द्वारा लिखित तथा शीना खालिद के निर्देशन में तैयार यह नाटक ‘द एलिफेंट इन द वॉम्ब’ पर आधारित है। इसकी कहानी मातृत्व के विभिन्न चरणों से गुजर रही पांच महिलाओं के अनुभवों को मिथकीय प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत करती है।
ड्रैगन, यूनिकॉर्न, स्पाइडर डेमन, वैम्पायर और वेयरवुल्फ जैसे रूपकों के जरिए भय, प्रेम, थकान, असुरक्षा और आत्मबल जैसी भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से उभारा गया। शैडो पपेट्री, लाइव संगीत और मूवमेंट ने प्रस्तुति को और सशक्त बनाया। अनुरूपा रॉय की छाया-कठपुतली और गाय हर्शबर्ग के संगीत ने मंचन में नई ऊंचाई जोड़ी। कल्कि कोचलिन सहित पूरी कलाकार मंडली के अभिनय को खूब सराहना मिली। कल्कि ने कहा कि नाटक मातृत्व के संघर्ष और बदलाव की वास्तविक यात्रा को सामने लाता है, जबकि शीना खालिद ने इसे अपनी सोच बदलने वाला अनुभव बताया।
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