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Delhi NCR News: खाली पड़े बेड, फिर भी स्ट्रेचर पर हो रहा इलाज
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- जीटीबी अस्पताल में स्ट्रेचर पर लिटा कर चढ़ाई जा रहीं ग्लूकोज की बोतल
- घंटों इंतजार के बाद मरीजों को मिल रहा बेड
प्रशांत चौहान
पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। यहां बेड खाली होने के बावजूद मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। शनिवार को मेडिसिन आपातकालीन विभाग में पहुंचे मरीजों को आधे-आधे घंटे तक बेड नहीं मिले। ऐसे में मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर ही ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई जा रही है, जिस कारण तीमारदार मरीजों के साथ बोतल पकड़े नजर आए।
इलाज के लिए आए तीमारदार राहुल ने बताया कि सुबह उनके ससुर को पेट में तेज दर्द होने पर अस्पताल लाए थे। आपातकालीन विभाग में जाने पर डॉक्टर ने पहले पर्ची बनवाने के लिए कहा और फिर उन्हें स्ट्रेचर पर ही लिटाकर ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी। आधे घंटे बाद जाकर उन्हें बेड मिला। वहीं, एक अन्य तीमारदार पंकज ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ने पर उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। वहां पर्ची बनवाने के बाद डॉक्टरों ने उसे स्ट्रेचर पर ही ग्लूकोज की बोतल लगा दी। उनकी पत्नी आधे घंटे तक ग्लूकोज की बोतल पकड़े खड़ी रहीं। इन समस्याओं को लेकर अस्पताल प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई तो संबंधित अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं मिले।
लोनी, गाजियाबाद के अलावा एनसीआर से पहुंचते हैं मरीज
जीटीबी अस्पताल इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और प्रमुख सरकारी अस्पताल है। यहां न केवल दिल्ली बल्कि गाजियाबाद, लोनी और आसपास के अन्य इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। इसके अलावा जीटीबी अस्पताल स्वामी दयानंद, हेडगेवार, लाल बहादुर शास्त्री व दिल्ली एनसीआर के कई छोटे अस्पतालों का रेफरल केंद्र बना हुआ है। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
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- घंटों इंतजार के बाद मरीजों को मिल रहा बेड
प्रशांत चौहान
पूर्वी दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। यहां बेड खाली होने के बावजूद मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। शनिवार को मेडिसिन आपातकालीन विभाग में पहुंचे मरीजों को आधे-आधे घंटे तक बेड नहीं मिले। ऐसे में मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर ही ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई जा रही है, जिस कारण तीमारदार मरीजों के साथ बोतल पकड़े नजर आए।
इलाज के लिए आए तीमारदार राहुल ने बताया कि सुबह उनके ससुर को पेट में तेज दर्द होने पर अस्पताल लाए थे। आपातकालीन विभाग में जाने पर डॉक्टर ने पहले पर्ची बनवाने के लिए कहा और फिर उन्हें स्ट्रेचर पर ही लिटाकर ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी। आधे घंटे बाद जाकर उन्हें बेड मिला। वहीं, एक अन्य तीमारदार पंकज ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ने पर उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। वहां पर्ची बनवाने के बाद डॉक्टरों ने उसे स्ट्रेचर पर ही ग्लूकोज की बोतल लगा दी। उनकी पत्नी आधे घंटे तक ग्लूकोज की बोतल पकड़े खड़ी रहीं। इन समस्याओं को लेकर अस्पताल प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश की गई तो संबंधित अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं मिले।
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लोनी, गाजियाबाद के अलावा एनसीआर से पहुंचते हैं मरीज
जीटीबी अस्पताल इस क्षेत्र का सबसे बड़ा और प्रमुख सरकारी अस्पताल है। यहां न केवल दिल्ली बल्कि गाजियाबाद, लोनी और आसपास के अन्य इलाकों से भी बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। इसके अलावा जीटीबी अस्पताल स्वामी दयानंद, हेडगेवार, लाल बहादुर शास्त्री व दिल्ली एनसीआर के कई छोटे अस्पतालों का रेफरल केंद्र बना हुआ है। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।
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