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Delhi: बांग्लादेशियों-रोहिंग्याओं ने दिल्ली की डेमोग्राफी बदली, JNU और टीआईएसएस की रिपोर्ट में खुलासा

Tue, 04 Feb 2025 03:57 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 04 Feb 2025 03:57 AM IST
सार

सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिणामों का विश्लेषण, शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, कम वेतन वाली नौकरियों में आप्रवासियों की भागीदारी ने स्थानीय लोगों के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है। वहीं, उनकी काम करने की इच्छा प्रभावित हुई है।

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Bangladeshis-Rohingyas changed the demography of Delhi, revealed in JNU and TISS report
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बांग्लादेश व म्यांमार के घुसपैठियों ने दिल्ली में आबादी के स्वरूप (डेमोग्राफी) को बदल दिया है। सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक परिदृश्य तो बदला ही है, चुनावी प्रक्रिया भी कमजोर हो रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार समेत दूसरी बुनियादी जरूरतों पर दबाब से दिल्ली की मूल आबादी में आक्रोश फैल रहा है। यह खुलासा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और टाटा इंस्टीटयूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट में हुआ है।

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दिल्ली में अवैध आप्रवासी
सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिणामों का विश्लेषण, शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, कम वेतन वाली नौकरियों में आप्रवासियों की भागीदारी ने स्थानीय लोगों के साथ आर्थिक प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है। वहीं, उनकी काम करने की इच्छा प्रभावित हुई है। कम वेतन के कारण कुछ क्षेत्रों में कुल कमाई में भी कमी आई है, जबकि अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है। जेएनयू की स्कूल ऑफ लैंग्वेज में रशियन लैंग्वेज की प्रो. मनुराधा चौधरी व प्रो. प्रीति डी दास की अगुवाई में विद्यार्थियों ने अध्ययन किया। 114 पन्नों की रिपोर्ट में अवैध आप्रवास में राजनीतिक संरक्षण की भूमिका और बुनियादी ढांचे व अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को रेखांकित किया गया है।
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राजनीतिक दल दे रहे संरक्षण
रिपोर्ट के अनुसार, घुसपैठिये दलालों व धार्मिक सहित अनौपचारिक नेटवर्क से दिल्ली पहुंचे हैं। कुछ सियासी दल उन्हें संरक्षण देते हैं और फर्जी मतदाता पंजीकरण की सुविधा दे रहे हैं। नकली पहचान दस्तावेज के अलावा आवास व नौकरियों तक में मदद की जा रही है। वे चुनावों में मतदान भी कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है।
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मुस्लिम बहुल इलाकों में सर्वाधिक
दिल्ली में 2017 के बाद बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की संख्या बढ़ी है। ये सीलमपुर, जामिया, सुल्तानपुरी, जाकिर नगर, मुस्तफाबाद, जाफराबाद, द्वारका, गोविंदपुरी समेत अन्य मुस्लिम बहुल भीड़भाड़ वाले इलाकों में बसे हैं।

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