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Delhi: वियाग्रा से मिलते-जुलते नाम व मार्क के इस्तेमाल पर रोक, दवा कंपनी को फाइजर को 3 लाख हर्जाना देने को कहा
Fri, 03 May 2024 07:43 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Fri, 03 May 2024 07:43 AM IST
सार
न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने रेनोवेशन एक्सपोर्ट्स प्रा. लि. को विगौरा या किसी अन्य चिह्न, जो फाइजर का ट्रेडमार्क वियाग्रा से मिलता-जुलता हो या फिर भ्रम पैदा करते हो, का उपयोग नहीं करने का निर्देश दिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने होम्योपैथिक दवा निर्माता को यौन विकारों की दवा बेचने के लिए विगौरा मार्क के इस्तेमाल पर स्थायी रूप से रोक लगा दी है। अदालत का यह फैसला फाइजर प्रोडक्ट्स इंक की ओर से दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन मुकदमे पर आया है।
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फाइजर ने कहा था कि कंपनी वियाग्रा ट्रेडमार्क के तहत प्रसिद्ध स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) एलोपैथिक दवा बेचती है। चूंकि, दोनों नामों की समानता है इसलिए वाणिज्यिक संचालन में भ्रम की मजबूत संभावना है। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने रेनोवेशन एक्सपोर्ट्स प्रा. लि. को विगौरा या किसी अन्य चिह्न, जो फाइजर का ट्रेडमार्क वियाग्रा से मिलता-जुलता हो या फिर भ्रम पैदा करते हो, का उपयोग नहीं करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने दवा कंपनी को तीन लाख रुपये हर्जाना देने को भी कहा। हालांकि, फाइजर ने 20 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया था।
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ब्रांड की पहचान पर असर
कोर्ट ने कहा, मिलते-जुलते नाम और मार्क की वजह से उपभोक्ता गलती से वियाग्रा के बदले विगौरा खरीदने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इससे कंपनी के ब्रांड की पहचान और विशिष्टता धुंधली होने के साथ ही आर्थिक नुकसान भी हो सकता है।
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