'1984 का दंगा कोई हादसा नहीं, सरकार की प्रायोजित हत्याएं'
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 1984 सिख दंगे पर 31 साल में सभी राजनीतिक दलों ने चिंता जताई, लेकिन दोषियों को सजा नहीं मिली और पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला।
अगर दोषियों को समय पर सजा मिली होती तो गुजरात, मुंबई और हाल में हुई दादरी की घटनाएं न हुई होतीं। मुआवजा और न्याय दोनों अलग-अलग पहलू हैं, लेकिन पीड़ितों को दोनों मिलने चाहिए।
सिख दंगा पीड़ित परिजनों को 5 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा चेक देने तिलक विहार पहुंचे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसौदिया समेत तमाम विधायकों ने इन्हें न्याय नहीं मिलने के विरोध में हाथ पर काली पट्टी भी बांधी।
नौ महिलाओं को मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने चेक सौंपे। रविवार को 1332 पीड़ित परिजनों को चेक सौंपे। एक सप्ताह में 2,600 चेक बांटे जाने हैं। कुछ महिलाएं चेक लेते समय भावुक हुईं। एक महिला ‘केजरीवाल बेटा, थैंक्यू सो मच’ कहकर चुप हो गई।
विभाजनकारी शक्तियां नफरत और सांप्रदायिक माहौल पैदा कर रही हैं
यहां केजरीवाल ने कहा कि देश में विभाजनकारी शक्तियां शांति और सौहार्द बिगाड़कर नफरत और सांप्रदायिक माहौल पैदा कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को सिख दंगे पर एसआईटी गठित किए आठ महीने बीत गए हैं लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
अब कानूनी विशेषज्ञ एचएस फुलका ने कहा है कि केंद्र सरकार ने गलत तरीके से एसआईटी बनाई है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि 1984 का दंगा कोई हादसा नहीं था बल्कि सरकार की प्रायोजित हत्याएं थी।
आजादी से पूर्व जनरल डायर ने हजारों निर्दोष का जनसंहार कराया था, आजादी के बाद 1984 का जनसंहार हुआ। हम कहते हैं देश तरक्की कर रहा है, मगर जो 31 साल पहले हुआ आज भी हो रहा है।