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Delhi: मां बनी महिलाओं को मैटरनिटी लीव न देने के दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, नियम की समीक्षा करने का किया आग्रह
Wed, 24 Jul 2024 10:42 PM IST
Vikas Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 24 Jul 2024 10:42 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से दो से अधिक बच्चों वाले सरकारी कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव न देने के नियम की समीक्षा करने का आग्रह किया है। कोर्ट ने कहा कि जनसंख्या विस्फोट के लिए केवल सरकारी कर्मचारी ही जिम्मेदार नहीं हैं।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में केंद्र सरकार से केंद्रीय सिविल सेवा सीसीएस (छुट्टी) नियम के नियम 43 पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, जो दो से अधिक बच्चों वाली महिला सरकारी कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) देने से इनकार करता है।
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न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा जनसंख्या विस्फोट के लिए केवल सरकारी कर्मचारी ही जिम्मेदार नहीं हैं। हमारे सामने ऐसा कुछ भी नहीं रखा गया है, जिससे पता चले कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकारी कर्मचारियों के अलावा अन्य नागरिकों के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं। यह महिला सरकारी कर्मचारी को तीसरे और उसके बाद के मातृत्व अवकाश के लिए प्रोत्साहित करने का सवाल नहीं है, यह तीसरे और उसके बाद के बच्चे के मां के स्पर्श के अधिकारों की रक्षा करने का सवाल है।
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पीठ ने कहा कि दो से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए हतोत्साहित करने वाले उपाय माता-पिता को लक्षित करने चाहिए, न कि बच्चों को। तीसरे और उसके बाद के बच्चे का क्या दोष है? उनका अपने जन्म पर कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसा होने पर तीसरे और उसके बाद के बच्चे को जन्म के तुरंत बाद और शैशवावस्था के दौरान मातृ स्पर्श से वंचित करने की अपेक्षा करना अत्याचार होगा, क्योंकि नियम 43 के अनुसार उस बच्चे की मां को प्रसव के अगले दिन ही आधिकारिक कर्तव्यों के लिए रिपोर्ट करना चाहिए। वह तीसरा और उसके बाद का बच्चा पूरी तरह से असहाय है, इसलिए न्यायालय का कर्तव्य है कि वह हस्तक्षेप करे।
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न्यायालय केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पुलिस अधिकारियों को तीसरे बच्चे वाली महिला कांस्टेबल को मातृत्व अवकाश देने का निर्देश दिया गया था। इस कांस्टेबल की पहली शादी (जो टूट चुकी थी) से दो बच्चे थे जबकि दूसरी शादी से भी उसका तीसरा बच्चा था। जब उसके मातृत्व अवकाश के आवेदन को खारिज कर दिया गया तो उसने कैट का रुख किया, जिसने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अपील में उच्च न्यायालय का रुख किया।
पीठ ने अपील को खारिज कर दिया और न्यायाधिकरण के आदेश को बरकरार रखा, साथ ही सरकारी अधिकारियों से सीसीएस (छुट्टी) नियमों के नियम 43 की स्थिरता पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।