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APJ Abdul Kalam: एक ऐसे शिक्षक जिनकी पढ़ाते वक्त हुई मौत, ये थे आखिरी शब्द, ऐसी ही कई अनसुनी बातें

Mon, 27 Jul 2020 02:41 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 27 Jul 2020 02:41 PM IST
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APJ Abdul Kalam Death Anniversary News in Hindi: rare facts about scientist and most favorite president of india
apj abdul kalam
भारत के महानतम वैज्ञानिकों में से एक, देश के सबसे दुलारे राष्ट्रपति और हर बच्चे के प्रेरणास्रोत डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर पूरा देश उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है। डॉ. कलाम एक ऐसी शख्सियत हैं जिनका पूरा जीवन ही किसी के लिए भी अनुकरण करने योग्य हो। उनकी हर एक बात, उनका हर एक किस्सा प्रेरणादायी है। हालांकि उनके जीवन की कई ऐसी बातें और रोचक किस्से हैं जिन्हें कम ही लोग जानते हैं। आइए इस मौके पर हम आपको डॉ. कलाम के उन्हीं किस्सों के बारे में बताते हैं...
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- जानकार बताते हैं कि, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक होने के साथ मनोवैज्ञानिक भी थे। उनको चेहरा पढ़ना भी आता था। वो किसी का भी चेहरा पढ़कर उसके बारे में बता देते थे।
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- पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम, उस शख्सियत का नाम है, जो जीवनभर ज्ञान के भूखे रहे और जिसमें दूसरों के भीतर भी ज्ञान की भूख जगाने की अद्भुत क्षमता थी। जिसने हमेशा विकास की बात की। विकास से उनका मतलब सिर्फ समाज से नहीं बल्कि व्यक्तिगत विकास से भी था।
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- डॉ. कलाम बच्चों को पढ़ने और जीवन में अपना लक्ष्य निर्धारित करने के लिए हमेशा प्रेरणा देते रहते थे। वह बच्चों को हमेशा जिज्ञासा बनाए रखने को कहते थे, वह कहते थे कि सवाल जरूर पूछो, तब तक पूछो जब तक समाधान न निकले। इसके साथ ही वह युवाओं और बुजुर्गों को घर में लाइब्रेरी बनाने के लिए भी कहते थे।

'आज हम कुछ नया सीखेंगे...', कहते ही गिर पड़े कलाम

APJ Abdul Kalam Death Anniversary News in Hindi: rare facts about scientist and most favorite president of india
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‘एक शाम डॉ. अब्दुल कलाम के नाम’ शीर्षक से आयोजित गंजिंग कार्निवाल में डॉ. कलाम के साथ खासा वक्त बिताने वाले उनके विशेष कार्याधिकारी सृजन पाल सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद कलाम से जुड़े जो अनुभव सुनाए थे। वो किस्से सुनकर वहां मौजूद दर्शकों की आंखें नम हो गईं थीं।

सृजन पाल सिंह ने डॉ. कलाम से हुई अपनी पहली मुलाकात से लेकर अंतिम समय तक की तमाम यादें साझा कीं। सृजन पाल सिंह ने बताया कि शिलॉन्ग में जब वह डॉ.कलाम के सूट में माइक लगा रहे थे तो उन्होंने पूछा ‘फनी गाय हाउ आर यू’, जिस पर मैंने जवाब दिया ‘सर ऑल इज वेल’।

उसी सभा में डॉ. कलाम फिर छात्रों की ओर मुड़े और बोले... ‘आज हम कुछ नया सीखेंगे’ और इतना कहते ही पीछे की ओर गिर पड़े। पूरे सभागार में सन्नाटा पसर गया।

जैसी मौत चाहते थे वैसी ही मिली

APJ Abdul Kalam Death Anniversary News in Hindi: rare facts about scientist and most favorite president of india
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सृजन पाल सिंह ने बताया कि डॉ.कलाम हर किसी से पूछते थे कि जीवन में किस क्षेत्र में पहचान बनाने की ख्वाहिश रखते हो, जिससे सफलता हासिल कर सकें।

10 जुलाई को डॉ. कलाम अपने घर के बगीचे में घूम रहे थे तो मैंने भी डॉ. कलाम से यह सवाल पूछ लिया। उन्होंने जवाब दिया कि ‘मैं चाहता हूं कि दुनिया मुझे शिक्षक के रूप में जाने’। फिर बोले कि मेरे हिसाब से दुनिया को अलविदा कहने का सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि ‘व्यक्ति सीधा खड़ा हो, जूते पहना हो और अपने पसंद का कार्य कर रहा हो’। यह सुनाते ही सृजन पाल की आंखें नम हो गईं।

सृजन पाल सिंह ने बताया कि डॉ.कलाम हमेशा देश के विकास, गांवों में शिक्षा का प्रसार, चिकित्सा व्यवस्था में सुधार जैसे मामलों पर गहनता से बातें करते थे। बताया कि वह जब किसी से मिलते थे तो उसे सलाह देते कि वह हर दिन अपनी मां के चेहरे पर एक मुस्कान जरूर दे।

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आस्था अस्पताल के डॉ.अभिषेक शुक्ल ने बताया कि डॉ.कलाम से कई बार मुलाकात हुई, लेकिन राजभवन की मुलाकात आज भी याद है। वहां मैंने वृद्धजनों की समस्याओं को लेकर उनसे बातचीत की, जिस पर डॉ.कलाम ने कहा कि समस्या संयुक्त परिवारों के खत्म होने की है।

न्यूक्लियर फैमिली में बुजुर्गों की देखरेख नहीं हो पाती। उनके सुझाव से वृद्धों के लिए काम करने में काफी सहायता मिली। डॉ. कलाम की कमी हमेशा खलेगी। एक प्रशासनिक अधिकारी राजशेखर ने बताया कि एयरपोर्ट की लॉबी में डॉ.अब्दुल कलाम से 40 मिनट की मुलाकात हुई और इस दौरान उन्होंने विकास के अलावा किसी और मुद्दे पर बात नहीं की।

उनका मानना था कि गांवों के विकास पर फोकस होना चाहिए। इसके अलावा बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को दुरुस्त करवाना सरकारों की प्राथमिकता रहनी चाहिए। डॉ.कलाम की सोच साधारण रहन-सहन के साथ सामाजिक रूप से उत्पादकता देने वाली थी।
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