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मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेल में बंद अपराधियों में घबराहट, यूपी में सलाखें भी असुरक्षित

Tue, 10 Jul 2018 07:29 AM IST
जेपी शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
जेपी शर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Tue, 10 Jul 2018 07:29 AM IST
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Anxiety in criminals after murder of Munna Bajrangi
lukshar jail

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद हुए ताबड़तोड़ एनकाउंटरों के बाद अपराधी जेल को सुरक्षित ठिकाना मानने लगे थे। अपराधी जेल से बाहर आने में घबराने लगे थे। ऐसे में बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेल में बंद बदमाशों में घबराहट है। अधिकांश जेल में एक दूसरे विरोधी बदमाश मौजूद हैं। लुकसर जिला कारागार भी इससे अछूता नहीं है।

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गौतमबुद्ध नगर जिले में सुंदर भाटी और अनिल दुजाना का बड़ा गिरोह है जिसका नेटवर्क पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है। दोनों गैंग एक दूसरे के विरोधी हैं। कई बार दोनों में गैंगवार भी हुआ है। यही वजह है कि दोनों को गौतमबुद्ध नगर जिला कारागार में न रखकर दूसरे जिले की जेलों में रखा गया है। हालांकि दोनों गिरोह में सदस्य लुकसर जेल में बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
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लुकसर जेल के सूत्रों का कहना है कि यहां दो सर्किल हैं। दोनों गिरोह में रंजिश के चलते ही अलग-अलग सर्किल में रखा गया है। जेल में सुंदर भाटी गिरोह के सदस्यों की संख्या काफी अधिक है। इनमें सुंदर भाटी के कुछ परिवार के भी लोग हैं। इन सक्रिय सदस्यों की संख्या लगभग 30 बताई गई है। इसके अलावा इतने ही ऐसे लोग हैं, जो विभिन्न कारणों से गिरोह से जुड़ गए हैं।

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Anxiety in criminals after murder of Munna Bajrangi
munna
दूसरे सर्किल में अनिल दुजाना गैंग के आठ-दस सदस्य मौजूद हैं। इसके अलावा सुंदर भाटी गिरोह का सरिया के गोरखधंधे में बड़ा दखल माना जाता रहा है। हाल ही में गाजियाबाद पुलिस ने उसके गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इधर, इस गोरखधंधे में सपा नेत्री बेवन नागर के देवर रविंद्र नागर को सुंदर भाटी का विरोधी माना जाता है। 

बेवन नागर के पति हरेंद्र नागर के पति की हत्या में भी सुंदर भाटी गैंग का नाम था। इस केस में हाल ही में रविंद्र नागर ने गवाही दी थी और इसके बाद वह भी सरिया लूट मामले में जेल भेज दिया गया। ऐसे में बागपत जेल में हुई वारदात के अंदेशे को यहां से नकारा नहीं जा सकता।  

एक ही अधीक्षक पर बागपत व गौतमबुद्ध नगर का जिम्मा  
एक वर्ष से अधिक समय से बागपत और गौतमबुद्ध नगर जिला कारागार का जिम्मा एक ही अधीक्षक पर है। तत्कालीन अधीक्षक एमएल यादव पहले दोनों जेल का प्रभार संभालते थे। उनके स्थानांतरण के बाद अधीक्षक विपिन मिश्रा पर यह दोहरी जिम्मेदारी है। बागपत में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद विपिन मिश्रा बागपत के लिए रवाना हो गए थे।
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