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दिल्ली विधानसभा चुनावः हर जिले के एक मतदान केंद्र पर सभी कर्मचारी होंगे दिव्यांग

Sat, 11 Jan 2020 06:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 11 Jan 2020 06:16 AM IST
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All the employees will be differently able at one polling station in every district
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विधानसभा चुनाव में इस बार सभी जिलों में एक-एक मतदान केंद्र ऐसा भी होंगे जहां मतदान कराने वाले सभी अधिकारी व कर्मचारी दिव्यांग होंगे। मुख्य निर्वाचन कार्यालय इस बार मॉडल केंद्र बनाना चाहता है। इसे लेकर सभी जिलों को निर्देश भी दिए जा चुके हैं। कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उत्तर पूर्वी दिल्ली क्षेत्र के गोकलपुर के मतदान केंद्र को इसके लिए चुना है। बाकी जिलों से भी जल्द ही जानकारी मिल जाएगी। 

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दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप इत्यादि की व्यवस्था भी होगी। बीते लोकसभा चुनाव में भी ऐसा किया गया था। तब ताहिरपुर में एक दिव्यांग विशेष मतदान केंद्र बनाया गया था। 
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दिल्ली में पिछले एक वर्ष के भीतर 9.96 लाख से ज्यादा वोटर बढ़े हैं। 18 जनवरी 2019 को दिल्ली में करीब 1.36 करोड़ वोटर थे जबकि अप्रैल 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान वोटर की संख्या 1.43 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी थी। दिल्ली में मतदाताओं की संख्या 6 जनवरी तक 1.46 करोड़ के पार हो चुकी है। 
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चुनाव आयोग के मुताबिक दिल्ली में अब 1,46,92,136 मतदाता  हैं। 18 जनवरी 2019 से 6 जनवरी 2020 के बीच 9,96,845 मतदाताओं की बढ़ोत्तरी हुई है। इनमें 4,95,305 महिलाएं शामिल हैं। वहीं 1,11,199 मतदाता ऐसे भी हैं जिनकी आयु 18 से 19 वर्ष के बीच है। इसी अवधि में दिल्ली की आबादी में 3,79,473 की वृद्घि भी होने का अनुमान है। दिल्ली में दिव्यांग वोटरों की कुल संख्या 55,823 है, जो पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों की तुलना में 15,291 (37.7 फीसदी) अधिक है। 

पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने हटाए पोस्टर
पूर्वी नगर निगम ने शुक्रवार को देर रात करीब 40 हजार से ज्यादा पोस्टर और होर्डिंग हटाए। आचार संहिता लागू होने के बाद से शाहदरा साउथ जोन में अभियान चलाया जा रहा था। हर वार्ड में इसकी जांच के लिए निगम ने टीम भी बनाई है। 

विजेंद्र गुप्ता ने सीएम से पूछे तीन सवाल

विधानसभा में नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जनहित का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से तीन सवाल पूछे हैं। उन्होंने दिल्ली में गरीबों को केंद्र की योजना के पूरे लाभ से वंचित रखने और पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती पर डीडीए को धमकाने के आरोप लगाए हैं।

शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में मीडिया से वार्ता में उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं से गरीबों और झुग्गी-झोपड़ी वालों को हमेशा वंचित रखा। गरीबों को घर देना हो या अनाज, केजरीवाल हमेशा इसमें बाधा बने। केंद्र की अंत्योदय अन्न योजना और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड योजना को लागू तो करने दिया, लेकिन फिर भी गरीबों तक इनका लाभ पहुंचने नहीं दिया। 

उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के पूर्व मंत्री अब डीडीए को धमका रहे हैं और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देने में रोड़ा बन रहे हैं।

उन्होंने पूछा कि अंत्योदय अन्न योजना और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड योजना के लाभ से गरीबों को वंचित क्यों रखा? जनआहार कैंटीन बंद कराकर गरीब वर्ग के लोगों के मुंह से निवाला छीनने का काम क्यों किया? 5 साल में दिल्ली सरकार न तो झुग्गी के बदले पक्का मकान दे पाई, न ही अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित कर पाई, लेकिन अब केंद्र सरकार ने काम शुरू कर दिया तो पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती डीडीए को क्यों धमका रहे हैं?

विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि अंत्योदय योजना के अंतर्गत दिल्ली में 1,56,800 गरीब परिवारों के लिए केंद्र सरकार हर महीने राशन मुहैया कराती है। हाउसहोल्ड प्रायोरिटी योजना के तहत 72,77,995 लोगों के लिए 2 रुपये किलो गेहूं और 3 रुपये किलो चावल दिल्ली सरकार को उपलब्ध कराए जाते हैं। यानी प्रत्येक व्यक्ति 5 किलो अन्न दिया जाता है। 

अब भी अंत्योदय अन्न योजना से लगभग 90 हजार और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड योजना से करीब 5 लाख लोगों को दिल्ली सरकार ने वंचित रखा है। दिल्ली सरकार ने जुलाई 2019 से ही राशन देने और राशन कार्ड बनवाने का काम रोका हुआ है।


पूर्वांचलियों के दम पर चुनावी जंग में उतरेगी आरजेडी 

भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) भी विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरने की तैयारी में है। पूर्वांचल के मतदाताओं के समर्थन से आरजेडी दिल्ली की पांच-छह सीटों पर अपना भाग्य आजमाएगी। उन विधानसभा क्षेत्रों में ही आरजेडी अपने प्रत्याशियों को उतारेगी जहां पूर्वांचल के मतदाता अधिक हैं। 

विधानसभा चुनाव में आरजेडी के नेता मनोज झा का कहना है कि इन विधानसभा क्षेत्रों में पहले से ही लाखों की संख्या में पूर्वांचल वासी रह रहे हैं। पूर्वांचल के अधिक वोटर होने की वजह से आरजेडी लगातार इस कोशिश में है कि दिल्ली की सीटों पर भी अपनी दावेदारी कैसे मजबूत करे। इन विधानसभा क्षेत्रों में अगर दूसरी पार्टियों का पलड़ा कमजोर रहा तो आरजेडी को इसका फायदा मिल सकता है। 

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