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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   All government schools in Delhi will undergo a structural audit, the CM issued instructions after finding deficiencies.

Delhi NCR News: दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट, मिली खामियों के बाद सीएम ने दिए निर्देश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 08:54 PM IST
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-औचक निरीक्षण में पानी, शौचालय और फायर सेफ्टी में मिलीं गंभीर खामियां, अधिकारियों को लगी फटकार
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-करीब 700 स्कूलों में नए भवन और बड़े सुधार की जरूरत, 40-50 साल पुराने ढांचे होंगे जांच के दायरे में

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों का व्यापक स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा। एक स्कूल के औचक निरीक्षण में गंभीर खामियां मिलने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इसके लिए अधिकारियों को लापरवाही बरतने पर फटकार भी लगाई है।

इस ऑडिट में स्कूल भवनों की मजबूती के साथ पानी, शौचालय, साफ-सफाई और फायर सेफ्टी जैसी जरूरी सुविधाओं की भी जांच होगी। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार सुबह रूपनगर नंबर चार स्थित राजकीय सर्वोदय विद्यालय का दौरा किया और स्कूल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कक्षाओं में जाकर छात्रों से सीधे बातचीत की और उनसे स्कूल की सुविधाओं को लेकर जानकारी ली। छात्रों ने मुख्यमंत्री को बताया कि स्कूल में पीने के साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वाटर कूलर और आरओ सिस्टम लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे उन्हें नल का पानी पीना पड़ रहा है। शौचालयों की हालत भी खराब पाई गई। कई टॉयलेट्स के दरवाजे टूटे हुए थे, सफाई नियमित नहीं हो रही थी और पानी की आपूर्ति भी ठीक नहीं थी।
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स्कूल का फायर सेफ्टी सिस्टम काम नहीं कर रहा
निरीक्षण में सामने आया कि स्कूल का फायर सेफ्टी सिस्टम काम नहीं कर रहा है। इन खामियों को देखकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाई और साफ कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी जरूरी सुधार तुरंत करने के निर्देश दिए। इस दौरान छात्रों ने शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को ध्यान देने को कहा।
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700 सरकारी स्कूल भवन में सुधार की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की नींव होते हैं। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने बताया कि करीब 700 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां नए भवन या बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है, क्योंकि कई इमारतें 40 से 50 साल पुरानी हो चुकी हैं और जर्जर हालत में हैं। ऑडिट के जरिए इन सभी स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा और जरूरत के अनुसार मरम्मत या पुनर्निर्माण के फैसले लिए जाएंगे। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं।


शिक्षा मॉडल की बात करते ही पिछली सरकार आई निशाने पर
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा मॉडल का सिर्फ प्रचार किया गया, जबकि जमीनी स्तर पर जरूरी काम नहीं हुए। अगर पहले सही तरीके से काम हुआ होता तो आज बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के लिए शिकायत नहीं करनी पड़ती। उनकी सरकार दिखावे की राजनीति नहीं, बल्कि ठोस काम कर रही है। पिछले एक साल में स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने और आधुनिक ढांचा तैयार करने पर काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि हर स्कूल में साफ पानी, स्वच्छ शौचालय, डिजिटल सुविधाएं और सुरक्षित माहौल मिले।
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