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एयरपोर्ट जमीन अधिग्रहण: 12 बच्चों वाले परिवार का मुआवजे में फसा पेंच

Tue, 15 Dec 2020 03:56 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी मनोज कुमार शर्मा, जेवर
मनोज कुमार शर्मा, जेवर Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Tue, 15 Dec 2020 03:56 PM IST
सार

  • परिवार के दस लोगों का ज्वांइट बैंक खाता न खुलने से नहीं मिल रहा मुआवजा
  • प्रशासन ने मांगा मां सहित नौ बच्चों का ज्वाइंट बैंक खाता, मुआवजे के लिए भटक रहा परिवार
  • परिवार का आरोप कोई बैंक दस सदस्यों का बैंक खाता खोलने को तैयार नहीं

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Airport Land Acquisition: trouble in compensation for family of 12 children
एयरपोर्ट-सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जेवर बांगर में एयरपोर्ट के प्रभावित छह गांव के किसानों के विस्थापन के लिए किए जा रहे 48 हेक्टेयर जमीन के किसानों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। किसान की मौत के बाद उसके 12 बच्चों के परिवार को मुआवजे का पेंच फस गया है। हांलांकि, इनमें से तीन बालिग होने के बाद कुल नौ बच्चे और किसान की पत्नी ही मुआवजे की हकदार हैं। अब इन दस लोगों का जवाइंट अकाउंट न खुलने से मुआवजा नहीं मिल पा रहा है। परिवार का आरोप है कि प्रशासन ज्वाइंट बैक खाते की मांग करता है लेकिन कोई भी बैंक तीन सदस्यों से अधिक बैंक खाता नहीं खोल रहा। 

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जेवर निवासी किसान इदरीश की कुछ समय पूर्व मौत हो गई थी। वहीं उनकी लगभग पौने तीन बीघा जमीन का जेवर बांगर में एयरपोर्ट प्रभावित गांव के विस्थापन के लिए अधिग्रहण किया जाना था। परिवार के व्यक्ति हसीन का आरोप है कि परिवार पहले दिन से ही सहमति के आधार पर अपनी जमीन देने के लिए तैयार था। इदरीश की मौत के बाद उनके वारीसों का नाम खतौनी में दर्ज नहीं था। 
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पहले तो काफी दिनों तक खतौनी में नाम दर्ज कराने के लिए टरकाया गया लेकिन नाम दर्ज होने के बाद भी परिवार को आजतक जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया है। वहीं दूसरा परिवार किसान हाकमीन का है। हाकमीन की मौत के बाद उसके दो बच्चों पुत्री एलिस व पुत्र मोहम्मद साद दोनों नाबालिग है। उनका संरक्षिका दादी परवीन के साथ खतौनी में नाम  दर्ज करवाने में काफी परेशानी हुई। परिवार का आरोप है कि दस हजार रुपये रिश्वत लेने के बाद खतौनी में नाम दर्ज किया गया। लेकिन आज तक दोनों में किसी परिवार को मुआवजा नहीं मिला है। 
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बड़ा परिवार होने की वजह से बैंक में तकनीकी वजह से नहीं खुल रहा ज्वाइंट खाता
इदरीश के बड़े लड़के ने बताया कि पिता की मौत के बाद परिवार में 12 भाई बहन थे। जिनमें से तीन की शादी हो चुकी है। जो मुआवजे में हिस्सेदार नहीं हैं। अन्य नौ भाई बहिनों में से हसीन, अनीस व बिलाल तीन बालिग है। जबकि जाकिर, मुनीषा, अलीसा, अलफिया, जोया, सरताज छह नाबालिग है। प्रशासन ने सभी छह नाबालिग का ज्वाइंट बैंक खाता मुआवजे के लिए मांगा था लेकिन बैंकों ने तीन लोगों से ज्यादा लोगो का ज्वाइंट बैक खञाता खोलने से मना करा दिया। जिसके बाद नाबालिग छहोंकबच्चों के मां नसीम के साथ अलग-अलग खाता बैक में खुलवाया गया। इसके बाद इन सभी खातों को प्रशासन को दे दिया गया। परिवार को आरोप है कि इसके बाद भी मुआवजा देने के लिए रिश्वत मांगी जा रही है। 


दो परिवारों को मुआवजा मिलने में कुछ दिक्कते रही है सभी समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई की जा रही है। दोनों परिवारों को जल्द मुआवजा उनके खातों में भेज दिया जायेगा। वहीं किसान अगर हल्का लेखपालों से संतुष्ट नहीं है तो 15 दिसंम्बर के बाद अधिसूचना समाप्त होने के साथ की ऐसे लेखपालों के खिलाफ कमेटी बनाकर जांच कराते हुए कार्रवाई की जाएगी। 
विनय कुमार भदौरिया तहसीलदार जेवर

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