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संजय का सवालः अमीरों के लिए हवाई जहाज, गरीबों के लिए ट्रेन क्यों नहीं
Fri, 22 May 2020 06:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 22 May 2020 06:14 AM IST
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आप नेता संजय सिंह
- फोटो : अमर उजाला
आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश में लॉकडाउन लगाने से पहले राज्यों से कोई अनुमति नहीं ली, लेकिन अब मजदूरों को उनके घर वापस भेजने के लिए राज्यों से अनुमति मांगी जा रही है।
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उन्होंने कहा कि अगर केंद्र मजदूरों को उनके घर वापस पहुंचाने पर गंभीर होता तो वह रेलवे की पूरी क्षमता का उपयोग करता जिससे एक ही दिन में करोड़ों श्रमिकों को उनके घर पहुंचा दिया जाता।
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उन्होंने आरोप लगाया कि अमीरों को देश लाने के लिए सरकार हवाई जहाज चला रही है, लेकिन गरीबों के लिए ट्रेन भी पर्याप्त संख्या में नहीं चला रही। उन्होंने कहा कि देश में लॉक डाउन लगाने से लेकर कोरोना संकट से निपटने के कई गंभीर सवालों का जवाब संसद में देना पड़ेगा।
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सिंह ने कहा कि जिस समय देश में पहला लॉकडाउन लागू किया गया, अगर उसी समय मजदूरों को एक हफ्ते का समय दिया गया होता तो आज लोग अपने घरों में सुरक्षित होते और सड़कों पर भटक न रहे होते। उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी केंद्र को लेनी पड़ेगी।
केंद्र द्वारा घोषित किया गया 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के सवाल पर आप सांसद ने कहा कि यह केंद्र सरकार के द्वारा केवल एक लोन मेला आयोजित किया गया था। यह कोरोना संकट में किसी की मदद नहीं कही जा सकती।
एक सवाल के जवाब में संजय ने कहा कि दिल्ली ने सबसे पहले बेहतर ढंग से इलाज की व्यवस्था की थी। आज भी कोरोना से मृत्यु दर के मामले में दिल्ली देश के दूसरे राज्यों से बेहतर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा तब आ रहा है जबकि हम देश में सबसे ज्यादा टेस्ट कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के पास इस समय आर्थिक संसाधन बहुत सीमित हो गए हैं और राज्य सरकार की कमाई बहुत कम हो गई है, राज्य सरकार इस समय भी लोगों की मदद में सबसे आगे है। ऑटो चलाने वाले गरीब ड्राइवर से लेकर श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद की गई है। रोजाना दस लाख लोगों को राशन दिया जा रहा है जबकि लाखों राशनकार्डधारकों को राशन मुहैया कराया जा रहा है।
मरकज को दोष देना मानसिक संकीर्णता
आप सांसद ने कहा कि दिल्ली या देश में कोरोना के मामलों के संक्रमण में वृद्धि के लिए किसी एक धर्म-संप्रदाय को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। यह मानसिक संकीर्णता है। केंद्र को जवाब देना चाहिए कि जब 30 जनवरी को ही कोरोना का पहला मामला सामने आ गया था, और दिल्ली में ज्याद लोगों के इकट्ठे होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था तो इतनी भारी संख्या में लोग निजामुद्दीन के पास मरकज में कैसे पहुंच गए।