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एम्स ने आईआईटी संग बनाया खर्राटे रोकने वाला मास्क
Wed, 31 Jul 2019 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 31 Jul 2019 06:43 AM IST
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मास्क
- फोटो : अमर उजाला
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अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग सोते समय तेज खर्राटे लेते हैं। कई लोग तो इनसे बचने के लिए मेडिकल उपकरणों तक का सहारा लेते हैं, लेकिन अब देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के एमबीबीएस विद्यार्थियों ने पहली बार आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर इस पर रिसर्च की है।
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विद्यार्थियों ने एक मास्क बनाया है, जिसमें नसल्स ट्यूब के अलावा एक विशेष प्रकार की परिनलिका लगी हुई है, जो रोगी को खर्राटे लेने से रोकती है। खर्राटे की इस बीमारी को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के नाम से जानते हैं। एम्स के एमबीबीएस छात्र इंद्रा व कीर्थी के शोध में आईआईटी दिल्ली के अजीथ व आर्थी ने सहायता की है।
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चिकित्सीय क्षेत्र में अभी तक एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थी पढ़ाई और मेडिसिन (इलाज) तक ही सीमित रहते हैं, जिस कारण ज्यादातर डॉक्टरों में तकनीकी की समझ विकसित नहीं हो पाती है, जबकि इस समय देश के चिकित्सीय क्षेत्र के आगे ज्यादा गुणवत्ता वाले सस्ते मेडिकल उपकरण बनाना सबसे अहम है।
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एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया बताते हैं कि एक बेहतर कल के लिए एम्स ने यह पहल शुरू की है। इसके तहत दिल्ली आईआईटी और जीनोम जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ मिलकर एम्स के एमबीबीएस विद्यार्थी तकनीकी को समझ कर नए शोध कर रहे हैं। कई प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद मंगलवार को एक कार्यशाला भी रखी गई थी, जिसमें विद्यार्थियों की सफलता देख वे काफी खुश हैं।
मरीज की सुन रहे थे धड़कन, तब आया आइडिया
एम्स में एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र तमोघना घोष बताते हैं कि उनके साथ विजय कुमार, ललित कुमार और आईआईटी के अंकित वर्मा ने मिलकर एक ब्लूटूथ युक्त स्टेथोस्कोप तैयार किया है। एमबीबीएस विद्यार्थियों को अभ्यास के लिए अक्सर मरीजों की जांच करनी होती है। प्रारंभ में मरीजों की दिल की धड़कनों के बारे में बताया जाता है।
चूंकि, उस वक्त बैच में काफी विद्यार्थी रहते हैं तो हर किसी को धड़कन सुनाई नहीं दे पाती। वहीं से इस तरह के उपकरण बनाने का आइडिया आया था। उन्होंने एक ऐसे ब्लूटूथ युक्त स्टेथोस्कोप को तैयार किया है, जिसे स्पीकर से जोड़ पूरे कक्ष में मरीज की धड़कन सुनी जा सकती है। स्टेथोस्कोप पर लगी एक डिवाइस की मदद से उन्होंने ऑडियो को इलेक्ट्रॉनिक का रूप दिया है।
उन्होंने बताया कि ये काफी सस्ता हो सकता है। महज डेढ़ हजार रुपये की लागत में इसे तैयार किया है। भारत में 63,985 चिकित्सीय विद्यार्थी हर वर्ष होते हैं, जबकि दुनियाभर में इन विद्यार्थियों की संख्या 2 करोड़ से ज्यादा है। इसलिए उनका सस्ता स्टेथोस्कोप आने वाले दिनों में काफी सुर्खियां बटोर सकता है।
खर्राटे के लिए हैं चार उपकरण
एमबीबीएस छात्र इंद्रा बताते हैं कि स्पील एपनिया के रोगियों की संख्या लाखों में है। वर्ष 2018 में इस रोग से पूरी दुनिया में करीब 1 बिलियन मरीज पंजीकृत हुए हैं। इन्हीं रोगियों के लिए उन्होंने ये उपकरण तैयार किया है। इस रोग की वजह से सबसे ज्यादा संबंधित व्यक्ति का जीवन और रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं।
वर्तमान में चार तरह के उपकरण बाजार में उपलब्ध हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा आम है एयरवे प्रेशर सिस्टम। इसमें एक पाइप, एक मॉनिटर और एक मास्क होता है, जिसे लगाकर रात में सोते हैं। इसी उपकरण को छोटा रूप देने के लिए उन्होंने अपनी टीम के साथ शोध किया और उपकरण को सूक्ष्म रूप देते हुए मास्क में ही सारे उपकरण जोड़ दिए। उन्होंने इसका नाम मिनी सीपीएपी डिवाइस दिया है।
चूंकि, उस वक्त बैच में काफी विद्यार्थी रहते हैं तो हर किसी को धड़कन सुनाई नहीं दे पाती। वहीं से इस तरह के उपकरण बनाने का आइडिया आया था। उन्होंने एक ऐसे ब्लूटूथ युक्त स्टेथोस्कोप को तैयार किया है, जिसे स्पीकर से जोड़ पूरे कक्ष में मरीज की धड़कन सुनी जा सकती है। स्टेथोस्कोप पर लगी एक डिवाइस की मदद से उन्होंने ऑडियो को इलेक्ट्रॉनिक का रूप दिया है।
उन्होंने बताया कि ये काफी सस्ता हो सकता है। महज डेढ़ हजार रुपये की लागत में इसे तैयार किया है। भारत में 63,985 चिकित्सीय विद्यार्थी हर वर्ष होते हैं, जबकि दुनियाभर में इन विद्यार्थियों की संख्या 2 करोड़ से ज्यादा है। इसलिए उनका सस्ता स्टेथोस्कोप आने वाले दिनों में काफी सुर्खियां बटोर सकता है।
खर्राटे के लिए हैं चार उपकरण
एमबीबीएस छात्र इंद्रा बताते हैं कि स्पील एपनिया के रोगियों की संख्या लाखों में है। वर्ष 2018 में इस रोग से पूरी दुनिया में करीब 1 बिलियन मरीज पंजीकृत हुए हैं। इन्हीं रोगियों के लिए उन्होंने ये उपकरण तैयार किया है। इस रोग की वजह से सबसे ज्यादा संबंधित व्यक्ति का जीवन और रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं।
वर्तमान में चार तरह के उपकरण बाजार में उपलब्ध हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा आम है एयरवे प्रेशर सिस्टम। इसमें एक पाइप, एक मॉनिटर और एक मास्क होता है, जिसे लगाकर रात में सोते हैं। इसी उपकरण को छोटा रूप देने के लिए उन्होंने अपनी टीम के साथ शोध किया और उपकरण को सूक्ष्म रूप देते हुए मास्क में ही सारे उपकरण जोड़ दिए। उन्होंने इसका नाम मिनी सीपीएपी डिवाइस दिया है।