सलमान की सजा दिल्ली के इस केस में ला देगी नया मोड़!
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सलमान खान हिट एंड रन केस में 13 साल बाद पीड़ितों को मिले न्याय ने दिल्ली के एक बेटे की भी आस जगा दी है कि उसके परिवार के साथ न्याय होगा।
बुधवार को सलमान खान केस में आए अदालत के फैलले ने 26 वर्षीय विपिन की आस जगा दी है। बता दें कि पिछले साल 14 दिसंबर को विपिन के पिता ने भी ऐसे ही ड्रिंक एंड ड्राइविंग केस मामले में एक मारुति इको के नीचे कुचले जाने के बाद अपनी जान गंवा दी थी।
विपिन के पिता 52 वर्षीय नागेंद्र पाल सिंह एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर थे। वो घटना की रात अपने घर से दूर दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के बॉर्डर पोस्ट पर तैनात अपनी ड्यूटी कर रहे थे।
6 महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा
विपिन के पिता नागेंद्र को किसी सेलिब्रिटी या कोई बहुत बड़े व्यापारी ने नहीं मारा था और शायद इसलिए उनकी मौत के वक्त वहां कोई पत्रकार, वकील या समाजसेवी या टीवी कैमरे उसके परिवार की कहानी बयान करने के लिए नहीं थे।
विपिन के परिवार द्वारा झेली जा रही मुसीबतों के बारे में लिखने के लिए भी कोई नहीं है। कोई नहीं है जो बताए कि उनके परिवार को अभी तक मुआवजे की राशि भी नहीं मिली है और न ही विपिन को उसके पिता की जगह पुलिस में नौकरी। बीते 6 महीनों में विपिन की नौकरी की अर्जी दो बार ठुकराई जा चुकी है।
'मेरी नौकरी की अर्जी दो बार ठुकराई गई'
सलमान के मामले में फैसला आने के बाद विपिन बोला कि, 'मैं सलमान केस का फैसला आने के बाद इसके बारे में पढ़ रहा था, इसमें 13 साल से भी ज्यादा का समय लग गया।'
'मैं सोचता हूं कि अभी मेरे परिवार को कितना लंबा लड़ना पड़ेगा। मुझे लगता है कि ये तो केवल हमारे परेशानियों की शुरूआत है। करीब एक महीने पहले मैं पुलिस मुख्यालय गया था। वहां मुझे बताया गया कि कुछ कागजात के न होने से मेरी नौकरी की याचिका को खारिज कर दिया गया है।'
'इसे अब तक दो बार ठुकराया जा चुका है। मुझे तो ये भी नहीं पता कि मेरे पिता को किसने मारा लेकिन मैं ये जानता हूं कि वो कोई एक्टर नहीं है इसलिए हमारे केस को अहमियत नहीं दी जाएगी।'
कुछ ऐसी है इस परिवार की कहानी
अपने परिवार में सबसे बड़ा होने के कारण विपिन अपने भविष्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर चिंतित है। विपिन का छोटा भाई अब भी आगरा यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई कर रहा है। विपिन के पिता नागेंद्र परिवार में कमाने वाले अकेले सदस्य थे।
इस वक्त इनके परिवार का गुजारा नागेंद्र के प्रॉविडेंट फंड से हो रहा है। विपिन के पिता नागेंद्र राष्ट्रपति भवन के पुलिस बैरक में रहते थे और उनकी आमदनी 10 हजार रुपए प्रति माह थी।
विपिन ने बताया कि उसके पिता पर गाड़ी चढ़ाने वाला एक ड्राइवर था और वो जेल में है। ये बात उसे पुलिस ने बताई थई। विपिन कहते हैं कि यह तो बीती बात है। इस वक्त उनका परिवार मुआवजा और नौकरी चाहता है।
वो प्रशासन से सवाल करते हैं कि वो ऐसे केस में मारे गए लोगों को मिले मुआवजे के बारे में सुनते रहते हैं। लेकिन उनका क्या। विपिन ये भी कहता है कि मुआवजे की बात जाने भी दें तो उसे केवल दिल्ली पुलिस में नौकरी ही दे दें।