{"_id":"5b3e547c4f1c1b9d468b4d8f","slug":"after-judgment-of-sc-officials-of-delhi-govt-authorities-refusing-to-accept-transfer-posting-order","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट का फैसला न मानने पर भड़की दिल्ली सरकार, एक बार फिर खटकाया जा सकता है कोर्ट का दरवाजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुप्रीम कोर्ट का फैसला न मानने पर भड़की दिल्ली सरकार, एक बार फिर खटकाया जा सकता है कोर्ट का दरवाजा
ब्यूरो ,अमर उजाला,नई दिल्ली
Updated Thu, 05 Jul 2018 10:55 PM IST
विज्ञापन
kejriwal manish
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी में प्रशासनिक संकट गहराता नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने बाद अधिकारियों ने ट्रांसफर पोस्टिंग संबंधी आदेश मानने से इंकार करने से दिल्ली सरकार गुस्सा गई है। वह एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रही है। इस संबंध में वकीलों से सलाह ली जा रही है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम और पी चिदंबरम से मुलाकात कर तकनीकी पक्षों को समझा है। वहीं, दिल्ली सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के संबंध में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को फिर से संकेत दिए।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि अधिकारी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहे हैं। सर्विस का मसला अब दिल्ली सरकार के पास है। इस अवमानना को लेकर वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इस बारे में वह अपने वकीलों की सलाह ले रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट ने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उपराज्यपाल फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं। उपराज्यपाल को कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही काम करना होगा। इसके बावजूद कैबिनेट का आदेश अधिकारी नहीं मान रहे हैं। यह पूरी तरह कोर्ट की अवमानना है।
विज्ञापन
राजनिवास ने चुप्पी साधी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर राजनिवास ने चुप्पी साध रखी है। उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सूत्रों के अनुसार इस मसले में राजनिवास दिल्ली सरकार के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रहा है, क्योंकि यह मामला संवेदनशील रूप ले चुका है। इस कारण फैसले को समझने के लिए विधि विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाएंगी। दूसरी ओर राजनिवास को लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट अभी भी उपराज्यपाल को प्रशासनिक प्रमुख मान रहा है। इस कारण उन्हें अब नियमों के अनुसार चलने के साथ-साथ विवेक का भी इस्तेमाल करने को कहा गया है।