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एक ही पत्नी से दो बार रचाई शादी: 2012 में पहली बार... 2023 में दूसरी बार एक दूजे के हुए, पढ़ें पूरा मामला

Mon, 27 Nov 2023 09:18 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: आकाश दुबे Updated Mon, 27 Nov 2023 09:18 PM IST
सार

दोनों ने पहली बार शादी 2012 में की थी। अब रविवार को फिर से आर्य समाज मंदिर में विवाह के बंधन में बंध गए। दोनों के फिर से नजदीक आने की वजह विजय को दिल का दौरा पड़ जाना रही।

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After divorce young man remarries his wife in Ghaziabad
दोबारा शादी की - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पांच साल पहले कानूनी रूप से तलाक लेकर एक-दूसरे से जुदा हुए विजय और पूजा फिर से सात फेरे लेकर एक-दूजे के हो गए हैं। दोनों ने पहली बार शादी 2012 में की थी। अब रविवार को फिर से आर्य समाज मंदिर में विवाह के बंधन में बंध गए। दोनों के फिर से नजदीक आने की वजह विजय को दिल का दौरा पड़ जाना रही। पूजा को जैसे ही इसका पता चला, वह पिछली सारी बातें भूलकर दौड़ी चली आईं। दोनों मिले तो गिले-शिकवे भुलाकर फिर से साथ रहने का फैसला लिया। दोनों के परिवारीजनों ने उनके फैसले में उनका साथ दिया।

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गाजियाबाद में कौशाबी में रहने वाले विनय जायसवाल मूल रूप से जौनपुर के मड़ियाहू के हैं और निजी कंपनी में काम करते हैं। वह कहते हैं कि शादी, तलाक और फिर से शादी के इस सिलसिले पर उनका कहना है कि तलाक से उनके रास्ते अलग-अलग हुए थे लेकिन मन में कोई कड़वाहट नहीं रखी थी। तलाक होने के बाद दोनों ने एक साथ बैठकर खाना खाया था और भविष्य को लेकर काफी देर तक बातें की थीं। इसके बाद दोनों की राहें अलग हो गईं। पूजा चौधरी अपने मायके पटना चली गई थीं। इसके बाद दोनों में लंबे समय तक कभी कोई बातचीत भी नहीं हुई।

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पति का दर्द सहन नहीं हुआ
विनय ने बताया कि 21 अगस्त 2023 को उन्हें दिल का दौरा पड़ा।ओपन हार्ट सर्जरी हुई। यह खबर पूजा को मिली तो उनसे पति का दर्द और जुदाई सहन नहीं हुई। वह पटना से सीधे गाजियाबाद आ गईं। दोनों मिले और फिर कभी अलग नहीं होने का फैसला कर लिया। दोनों परिवारों की सहमति लेकर 23 नवंबर को कविनगर स्थित आर्य समाज मंदिर में फिर से एक दूसरे को जयमाला पहनाई।

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सुप्रीम कोर्ट तक चला था केस
दोनों की शादी वर्ष 2012 में हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही छोटी-छोटी बातों पर कहासुनी हुई तो आपसी मतभेद बढ़ गया। दोनों ने अलग रहने के लिए गाजियाबाद परिवार न्यायालय में तलाक की अर्जी लगा दी। शुरुआत विनय ने की थी। पांच साल की सुनवाई के बाद वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद दोनों का विधिवत तलाक हो गया था।

तलाक के मुकदमे से दोनों को कष्ट
विनय ने कहा कि पति-पत्नी में छोटी-छोटी बातों पर कहासुनी होना सामान्य बात है। ऐसे में तलाक जैसा कदम उठाने से पहले बहुत सोचना चाहिए। यह अंतिम विकल्प होना चाहिए। तलाक के मुकदमे से पति-पत्नी दोनों को कष्ट होता है। कोशिश करनी चाहिए कि बातचीत से ही मामला सुलझ जाए। कई बार गलतफहमी हो जाती है। बात कुछ होती है और समझ कुछ और लिया जाता है। बाद में पछताना होता है लेकिन तलाक हो जाए तो पीछे वापस जाना मुश्किल हो जाता है।

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