महिला पिटती रही, देखती रही पुलिस
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दिल्ली में सड़क के आवारा कुत्ते को टीका(इंजेक्शन) लगाने गई एक महिला समाजसेवी के साथ जैसा व्यवहार लोगों ने किया वह बेहद चौंकाने वाला था।
दिल्ली के मुखर्जी नगर में शनिवार की शाम को एक महिला समाजसेवी को स्थानीय लोगों ने बुरी तरह से पीटा और उसका शोषण भी किया।
महिला समाजसेवी ने पुलिस पर यू-टर्न का आरोप लगाते हुए बताया कि, उसके पास एमसीडी से मिली अनुमति पत्र की कॉपी भी थी। जिसे लेकर पुलिस के साथ वह कॉलोनी के आवारा कुत्तों का टीकाकरण करने गई थी।
लेकिन जब भीड़ उसपर टूट पड़ी तो पुलिस ने कोई सहायता नहीं की। हालांकि पुलिस ने बताया कि उसने महिला की शिकायत पर उत्पीड़न का मामला दर्ज कर लिया है।
लेकिन साथ ही साथ पुलिस ने महिला के खिलाफ भी तीन अन्य महिलाओं की शिकायत दर्ज की है। इन औरतों को पीड़ित महिला ने काट लिया था जिनमें से एक के शरीर पर बहुत गहरा निशान पड़ गया है।
कुत्ते को उठाते ही टूट पड़ी भीड़
अपनी आप बीती सुनाते हुए पीड़िता ने बताया कि शनिवार को जब वह शाम 4:30 बजे कॉलोनी में पहुंची तो आरडब्ल्यूए के सदस्यों ने उसे कुत्ते को ले जाने से रोक लिया और एमसीडी का अनुमति पत्र मांगा।
पीड़िता ने बताया कि फिर वह अपने घर गई और अनुमति पत्र लेकर मुखर्जी नगर वापस आने लगी तो एक पीसीआर वैन ने उसे रोक लिया और अपने साथ चलने को कहा। जब महिला ने उन्हें अनुमति पत्र दिखाया तो उन्होंने अपने सीनियर अधिकारियों से मश्विरा किया।
उसके बाद पुलिस वालों ने महिला को बताया कि उसके पास कुत्तों को टीका करने का पूरा हक है और वह भी उसके साथ हो लिए। लेकिन गेट पर उन्हें दोबारा रोक लिया गया। पीड़िता के अनुसार इस बार आरडब्ल्यूए सदस्यों के साथ बहुत सारे स्थानीय लोगों ने भी उनका घेराव कर लिया जिसमें कुछ महिलाएं भी थी।
पुलिस भीड़ को पीछे हटने का आदेश दिया। लेकिन जब वह लोग पीछे नहीं हटे तो एक कांस्टेबल ने पीड़िता को कॉलोनी में घुसकर कुत्ता लाने को कहा। जैसे ही वह कॉलोनी में घुसी और कुत्ते को उठाया तो स्थानीय लोगों ने उसका घेराव कर लिया।
पीड़िता के साथ किया आरोपी सा व्यवहार
महिला का आरोप है कि शुरूआत में तो पुलिस ने उसे बचाने का प्रयास किया लेकिन बाद में जब कुछ आदमी उसे गलत तरीके से छू रहे थे और मार रहे थे तो पुलिस मूक दर्शक बनी देख रही थी।
महिला ने बताया कि कुत्ता बहुत डरा हुआ था और मैंने उसे जाने नहीं दिया क्योंकि वह किसी को काट सकता था। इसी बीच कुछ लोग इस हादसे का वीडियो बना रहे थे।
जब हालात बदतर हो गए और महिलाएं भी उसे मार रही थीं तो महिला ने उसने कुत्ते को छोड़ दिया इसके बाद एक महिला कांस्टेबल ने उसे पीसीआर वैन में खींच लिया। महिला ने ये भी कहा कि पुलिस स्टेशन में उसके साथ पीड़ित नहीं बल्कि दोषी के रूप में बर्ताव किया गया।
वो तो अगर मेनका गांधी के ऑफिस के कुछ लोग और अन्य समाज सेवी आकर ये न बताते कि वह कुत्तों के टीकाकरण के लिए गई थी तो न जाने उसके साथ कैसा बर्ताव किया जाता।