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कौन कितना जिम्मेदार: दिल्ली का दम घोंटने में किसकी कितनी हिस्सेदारी, जानकार बोले- दिवाली तक हालत होंगे और खराब

Sun, 05 Nov 2023 10:28 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 05 Nov 2023 10:28 PM IST
सार

दिल्ली में प्रदूषण अंडर कंट्रोल (पीयूसी) के बिना वाहन चलाना नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद भी कई वाहनों बिना पीयूसी के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीयूसी का सबसे अधिक उल्लंघन दोपहिया वाहन चालक कर रहे हैं। 

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According to DSS vehicular pollution 40 percent of Delhi pollution and bio-burning accounts for 30 percent
दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण का स्तर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में वायु प्रदूषण गंभीर श्रेणी में बरकरार है। ऐसे में दम घोंटू होती इस हवा में वाहनों व पराली का धुआं अधिक जिम्मेदार है। डिसिजन स्पोर्ट सिस्टम फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट दिल्ली (डीएसएस) के अनुसार पीएम 2.5 के स्तर में वृद्धि में 40 फीसदी हिस्सा वाहनों व दिल्ली के घरेलू स्रोतों से हो रहा है। वहीं, इसमें 20 से 25 प्रतिशत हिस्सेदारी पराली की सामने आई है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली तक इसमें और वृद्धि देखने को मिल सकती है। जिससे तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने की जरूरत है। बता दें, बीते दिनों पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भी वाहनों से होने वाले प्रदूषण की ओर ध्यान आकर्षित किया था। जिससे उन्होंने लोगों से सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल करने की ओर जोर दिया था।

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एक रिपोर्ट के अनुसार वाहनों के अलावा, घरेलू स्रोत दिल्ली के प्रदूषण में 13 फीसदी का योगदान देते हैं। वहीं, उद्योगों का 11 फीसदी, निर्माण का सात फीसदी और कचरा जलाने और ऊर्जा क्षेत्र का पांच फीसदी योगदान है। सड़क की धूल और अन्य स्रोत चार फीसदी योगदान करते हैं। वहीं, वाहन उत्सर्जन और घर के अंदर खाना पकाने से होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण के शीर्ष स्रोत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर क्षमता से अधिक वाहन चल रहे हैं। इन्हें सबसे पहले नियंत्रित करना जरूरी है।

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सबसे अधिक दोपहिया वाहनों की है संख्या
दिल्ली में सबसे अधिक दोपहिया वाहनों की संख्या है। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में करीब 80 लाख दोपहिया वाहन हैं। वहीं, लगभग 35 लाख कार पंजीकृत हैं। जहां तक डीजल वाहनों की बात है तो इनकी संख्या निजी वाहनों में अच्छी खासी है, जो प्रदूषण में इजाफे के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं।

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पीयूसी के बिना दौड़ रहे हैं वाहन
दिल्ली में प्रदूषण अंडर कंट्रोल (पीयूसी) के बिना वाहन चलाना नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद भी कई वाहनों बिना पीयूसी के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पीयूसी का सबसे अधिक उल्लंघन दोपहिया वाहन चालक कर रहे हैं। अभी भी 20 से 25 लाख दोपहिया वाहन ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक अपना पीयूसी नहीं करवाया है। ऐसे में इनके खिलाफ कार्रवाई करने वाला परिवहन विभाग विशेष जांच अभियान चलाता भी है तो वह खानापूर्ति से ज्यादा कुछ नहीं दिख रहा है।

रोज सड़कों पर उतरते हैं 60 लाख वाहन
दिल्ली की सड़कों पर रोज करीब 60 लाख से अधिक वाहन उतरते हैं, लेकिन इनकी प्रदूषण जांच के लिए परिवहन विभाग के पास कर्मचारियों की टीम भी पर्याप्त नहीं है। कुछ प्रदूषण जांच केंद्र ऐसे भी हैं जो डीजल वाहनों की जांच करने में आनाकानी करते हैं और वाहनों को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र भी जारी नहीं करते हैं।

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