लव जिहाद: यूपी के बाद अब दिल्ली में दस्तक!
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देश भर में बढ़ी सरगर्मी और मचे बवाल के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय में भी लव जिहाद की हलचल होने लगी है। देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी में लव जिहाद का मुद्दा उठाया है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने।
एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने कैंपस में लव जिहाद के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। छात्रों का कहना है कि उनका मकसद महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों को रोकने के लिए लव जिहाद जैसे मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाना है, साथ ही लिव इन रिलेशनशिप के खतरों के बारे में भी आगाह करेंगे।
एबीवीपी के नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि, जबरन किसी हिंदू महिला का मुस्लिम पुरुष के द्वारा धर्मपरिवर्तन लव जिहाद है। उन्होंने यह भी कहा कि सांम्प्रदायिक स्वर होने के कारण वे शब्द के इस्तेमाल से बच रहे हैं लेकिन उनके अभियान का सीधा मकसद ऐसी घटनाओं को रोकना है।
'हम प्यार के खिलाफ नहीं हैं'
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव रोहित चहल ने कहा कि हम प्यार के खिलाफ नहीं हैं, हमारा मकसद किसी समुदाय विशेष को लक्ष्य बनाना भी नहीं है, लेकिन किसी भी हिंदू महिला को जबरन इस्लाम कबूल करने के लिए प्रताड़ित करना गलत है। पूरे साल चलने वाले इस अभियान के तहत लड़कियों को ऐसे धोखे में न फंसने की सलाह दी जाएगी और उन्हें तरह-तरह के माध्यमों से जागरूक किया जाएगा।
यह अभियान छात्र-छात्राओं को लिव इन रिलेशनशिप के खतरों के प्रति भी आगाह करेगा, क्योंकि यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। इसके लिए संगठन कुछ छात्रों के समूह भी बनाएगा जो लिव इन के खतरों के बारे में लोगों को सचेत करेगा।
एबीवीपी के सचिव साकेत बहुगुणा ने बताया कि लिव इन रिलेशनशिप भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ है। यह भी एकदम सत्य बात है कि ऐसे रिश्ते मुश्किल से ही सफल होते हैं। हम अलग-अलग कॉलेजों में छात्रों के समूह बनाएंगे जो छात्रों के बीच ऐसे रिश्तों के उदाहरण पेश करके उन्हें जागरूक करेंगे।
'लव जिहाद' और 'लिव इन रिलेशनशिप'
एबीवीवी के नेताओं ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सम्मान को बचाना और उसकी रक्षा करना है। साथ ही शराब और ड्रग से मुक्त संस्कृति को बढ़ावा देना है।
चहल ने कहा कि 'लव जिहाद' और 'लिव इन रिलेशनशिप', ये दोनों मुद्दे एबीवीपी की एक राष्ट्रीय वर्कशॉप में उठाए गए थे। लड़कियों के लिए यह वर्कशॉप लखनऊ में अगस्त में आयोजित की गई थी।
एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव मुरली मनोहर ने कहा कि संगठन का उद्देश्य लड़कियों यह बताना है कि गलत पहचान वाले लोगों के बहकावे में न आएं और झूठी बातों में फंसकर ऐसे किसी भी व्यक्ति से शादी न कर बैठें, जिससे उन्हें बाद में मुश्किलें झेलनी पड़ें। यह अभियान इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएगा लेकिन हम इसे लव जिहाद नहीं कह रहे हैं।
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष मोहित डागर ने कहा कि डूसू इस बारे में आगे चलकर फैसला लेगा। हालांकि हम 'लव जिहाद' शब्द का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करेंगे, लेकिन यह एक गंभीर मुद्दा है जिसका समाधान हमें करना ही होगा।
यूपी के बाद अब दिल्ली है निशाना?
बता दें कि लोकसभा चुनाव के पहले से ही खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 'लव जिहाद' के मुद्दे पर ख़ासी राजनीतिक सरगर्मी है। इन इलाक़ों में होने वाले हर अंतर-धार्मिक प्रेम विवाह को 'लव जिहाद' और 'प्रेम युद्ध' के रूप में ही देखा जा रहा है।
'लव जिहाद' का सबसे पहला मामला यूपी में ही सामने आया था। इसमें दो युवतियों के परिवार ने आरोप लगाया था कि प्यार की आड़ में उनकी बेटियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। 2006 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को जांच के आदेश दिए थे।
इसके बाद दक्षिण भारत के राज्यों कर्नाटक और केरल में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। ज्यादातर मामलों में कट्टर मुस्लिम युवकों पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपना नाम बदलकर हिंदू लड़कियों से नजदीकियां बढ़ाईं और प्यार का नाटक कर शादी की और फिर जबरन उनका धर्म परिवर्तन कराया।
मथुरा में लव जिहाद की चिगारी भड़की तो वहां की सांसद हेमा मालिनी ने ये मुद्दा संसद में उठाया। इसके बाद मेरठ, गाजियाबाद में भी कई मामले सामने आए।
हालांकि इस सब के पीछे सबसे ज्यादा भाजपा नेताओं पर ही गंभीर आरोप लगे हैं। यूपी में समाजवादी पार्टी ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा था कि भाजपा नेता लव जिहाद को लेकर राजनीति कर रहे हैं और वोटों के लिए धार्मिक भावनाएं भड़का रहे हैं।
अब चुनाव के बाद दिल्ली में यह मुद्दा फिर उठाया जा रहा है।