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Delhi NCR News: त्योहारों में तीर-कमान और पटाखों से आंखों की रोशनी जाने का खतरा
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-एम्स दिल्ली में जागरूकता को लेकर हुआ सार्वजनिक व्याख्यान एवं पैनल वार्ता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में दशहरा और दिवाली के दौरान तीर-कमान चलाना, पटाखे जलाना और कार्बाइड गन का इस्तेमाल आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। थोड़ी सी लापरवाही से आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसी को लेकर एम्स दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र में सार्वजनिक व्याख्यान और पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले वर्ष करीब 190 मामले आंखों में चोट के सामने आए थे। कार्यक्रम में नेत्रदान पखवाड़े के तहत कॉर्निया से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई।
सार्वजनिक व्याख्यान में डॉ. मनप्रीत कौर ने बताया कि त्योहारों के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में आंखों की चोट के मामले अधिक सामने आते हैं। इनमें 65 प्रतिशत से अधिक लड़के होते हैं। आंखों में चोट का सबसे आम कारण 15.2 प्रतिशत मामलों में तीर-कमान पाया गया। इससे कॉर्निया में कट या छेद, आंख के लेंस को नुकसान, आंख के अंदर रक्तस्राव और रेटिना के अलग होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। कई मामलों में आंख की पुतली तक फट जाती है, जिसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से सर्जरी कर टांके लगाने पड़ते हैं।
पटाखों के गर्म कण और रसायन भी खतरनाक
विशेषज्ञों ने बताया कि पटाखे फटने से निकलने वाले गर्म कण और रसायन आंख की सतह को जला सकते हैं। तेज धमाके से आंख में गंभीर चोट और पुतली फटने की स्थिति भी बन सकती है। कैल्शियम कार्बाइड से बनाई जाने वाली देसी कार्बाइड गन भी बेहद खतरनाक है। पानी और कैल्शियम कार्बाइड की प्रतिक्रिया से बनने वाली गैस को जलाने पर धमाका होता है। कई बार विस्फोट में देरी होने पर बच्चे पाइप के अंदर देखने लगते हैं। ऐसे में अचानक धमाका होने से गर्म रसायन, दबाव और प्लास्टिक के टुकड़े आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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आंख में चोट लगे तो न करें ये काम
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि आंख में चोट लगने पर उसे रगड़ना या दबाव डालना नहीं चाहिए। यदि आंख में कोई वस्तु धंसी हो तो उसे खुद निकालने की कोशिश न करें। गंभीर चोट की स्थिति में तत्काल नेत्र विशेषज्ञ या नजदीकी अस्पताल की आपात सेवा में पहुंचना चाहिए।
एम्स दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र की प्रमुख डॉ. राधिका टंडन ने कहा कि आंखों की देखभाल को लेकर लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बरसात में लालपन, पानी आने और संक्रमण की समस्या बढ़ती है, जबकि त्योहारों में थोड़ी सी लापरवाही भी आंखों के लिए गंभीर परिणाम दे सकती है। कार्यक्रम में डॉ. नम्रता शर्मा और डॉ. श्रीदेवी नैयर भी शामिल हुईं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में दशहरा और दिवाली के दौरान तीर-कमान चलाना, पटाखे जलाना और कार्बाइड गन का इस्तेमाल आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। थोड़ी सी लापरवाही से आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसी को लेकर एम्स दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र में सार्वजनिक व्याख्यान और पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले वर्ष करीब 190 मामले आंखों में चोट के सामने आए थे। कार्यक्रम में नेत्रदान पखवाड़े के तहत कॉर्निया से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई।
सार्वजनिक व्याख्यान में डॉ. मनप्रीत कौर ने बताया कि त्योहारों के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में आंखों की चोट के मामले अधिक सामने आते हैं। इनमें 65 प्रतिशत से अधिक लड़के होते हैं। आंखों में चोट का सबसे आम कारण 15.2 प्रतिशत मामलों में तीर-कमान पाया गया। इससे कॉर्निया में कट या छेद, आंख के लेंस को नुकसान, आंख के अंदर रक्तस्राव और रेटिना के अलग होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। कई मामलों में आंख की पुतली तक फट जाती है, जिसके बाद माइक्रोस्कोप की मदद से सर्जरी कर टांके लगाने पड़ते हैं।
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पटाखों के गर्म कण और रसायन भी खतरनाक
विशेषज्ञों ने बताया कि पटाखे फटने से निकलने वाले गर्म कण और रसायन आंख की सतह को जला सकते हैं। तेज धमाके से आंख में गंभीर चोट और पुतली फटने की स्थिति भी बन सकती है। कैल्शियम कार्बाइड से बनाई जाने वाली देसी कार्बाइड गन भी बेहद खतरनाक है। पानी और कैल्शियम कार्बाइड की प्रतिक्रिया से बनने वाली गैस को जलाने पर धमाका होता है। कई बार विस्फोट में देरी होने पर बच्चे पाइप के अंदर देखने लगते हैं। ऐसे में अचानक धमाका होने से गर्म रसायन, दबाव और प्लास्टिक के टुकड़े आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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आंख में चोट लगे तो न करें ये काम
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि आंख में चोट लगने पर उसे रगड़ना या दबाव डालना नहीं चाहिए। यदि आंख में कोई वस्तु धंसी हो तो उसे खुद निकालने की कोशिश न करें। गंभीर चोट की स्थिति में तत्काल नेत्र विशेषज्ञ या नजदीकी अस्पताल की आपात सेवा में पहुंचना चाहिए।
एम्स दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र की प्रमुख डॉ. राधिका टंडन ने कहा कि आंखों की देखभाल को लेकर लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बरसात में लालपन, पानी आने और संक्रमण की समस्या बढ़ती है, जबकि त्योहारों में थोड़ी सी लापरवाही भी आंखों के लिए गंभीर परिणाम दे सकती है। कार्यक्रम में डॉ. नम्रता शर्मा और डॉ. श्रीदेवी नैयर भी शामिल हुईं।