मुजफ्फरनगर दंगों का बदला लेना चाहता था आतंकी
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आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा मेवात मॉड्यूल गोपालगढ़ (राजस्थान) और मुजफ्फरनगर दंगों का बदला लेना चाहता था। दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में मौजूद आतंकी अब्दुल सुभान ने यह खुलासा किया।
उसने बताया कि वह करीब चार बार मुजफ्फरनगर था और वहां दंगा पीड़ितों से मिला था। वह उन्हें बरगला कर मेवात मॉड्यूल में शामिल करना चाहता था।
पुलिस के अनुसार मेवात मॉड्यूल से जुड़े मोहम्मद राशिद और मोहम्मद शाहिद को सबसे पहले गिरफ्तार किया गया था। ये दोनों अब्दुल सुभान के साथ मुजफ्फर नगर गए थे। वहां वे दंगा पीड़ितों से मिले थे। लश्कर की दंगों के नाम पर युवकों को बरगला कर आतंकी बनाने की योजना थी।
पाकिस्तानी बलूची के संपर्क में था सुभान
मुजफ्फरनगर से लौटते वक्त ये यूपी के शामली आदि जगहों पर कई लोगों से भी मिले थे। इन्होंने जिन लोगों से मुलाकात की थी, उन्हें पुलिस की स्पेशल सेल ने गवाह बनाया है। इनमें जमीर और शामली का एक शिक्षक लियाकत शामिल है।
स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मेवात मॉड्यूल के सदस्य मेवात से सटे राजस्थान के गोपालगढ़ कस्बे में वर्ष 2011 में हुए दंगों का बदला लेना चाहते थे। यहां धार्मिक सौहार्द को खराब करने के लिए वे पाकिस्तान में बैठे जावेद बलूची के संपर्क में थे।
लश्कर-ए-तैयबा ने मेवात मॉड्यूल की मदद से किसी बड़े उद्योगपति या नेता के अपहरण की योजना बनाई थी। इसके मुताबिक फिरौती की रकम दुबई में वसूली जाती और इस रकम से बड़े पैमाने पर पाकिस्तान से हथियार मंगाए जाते।
इन्हीं हथियारों से दिल्ली में कई स्थानों पर फिदायीन हमले या भीड़भाड़ वाले इलाके में मुंबई जैसे आतंकी हमले की साजिश रची गई थी।
हमले के लिए पुरानी रणनीति अपना रहे थे आतंकी
सुभान ने बताया कि वह वाराणसी के बदमाश आफताब अहमद (अभी कोलकाता जेल में बंद) और आसिफ, आमिर और अपने भतीजे असाबुद्दीन के साथ काम कर चुका है। सुभान 2001 में आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया था। इसी वर्ष सीबीआई ने उसे असाबुद्दीन के साथ हथियारों के ट्रक के साथ गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस के अनुसार असाबुद्दीन और आफताब अंसारी आदि ने खादिम शूज केमालिक पार्थो राय बर्मन का अपहरण किया था और करोड़ों की फिरौती लेकर उन्हें मुक्त किया था।
बताया जा रहा है फिरौती की रकम का उपयोग आतंकी वारदातों के लिए किया गया था। मेवात मॉड्यूल की पुरानी रणनीति अपनाते हुए बड़े उद्योगपति या नेता के अपहरण की योजना थी।
राहुल गांधी ने दिया था बयान
गौरतलब है अब्दुल सुभान के खुलासे से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान की पुष्टि होती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक अधिकारी ने उन्हें बताया है कि आईएसआई एजेंट मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के संपर्क में थे।
इस बयान को लेकर काफी बवाल हुआ था। हालांकि दिल्ली पुलिस अभी इस बात से इनकार कर रही है कि सुभान दंगा पीड़ितों से मिला था।
पुलिस के अनुसार युवकों को मेवात मॉड्यूल में शामिल करने के लिए अब्दुल सुभान मुजफ्फरनगर से लौटते वक्त देवबंद गया था। वहां उसने काफी संख्या में धार्मिक पुस्तकें खरीदी थीं, ताकि इन्हें पढ़ाकर युवकों को आसानी से बरगलाया जा सके।
दिल्ली में चुनाव के दौरान थी हमले की साजिश
वर्ष 2012 में वह दो बार पाकिस्तान गया और आतंकवाद की ट्रेनिंग ली। उसने पाकिस्तान में लश्कर कमांडर जावेद बलूची से मुलाकात की थी। सुभान को बेरोजगार युवकों को जेहादी बनाने और मेवात मॉड्यूल खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इसी ने मो. राशिद और मो. शाहिद को मेवात मॉड्यूल में शामिल किया था। इसके बाद दोनों को और लड़ाके मेवात मॉड्यूल में शामिल करने की जिम्मेदारी दी गई थी। शाहिद भी कई बार पाकिस्तान गया था।
मेवात मॉड्यूल 4 दिसंबर को दिल्ली में विधानसभा चुनावों के दौरान आतंकी हमला करना था, लेकिन पुलिस के नवंबर में पर्दाफाश करने पर मेवात मॉड्यूल के आतंकी नापाक इरादों में कामयाब नहीं हो पाए थे।
आतंकियों को एक साथ बैठाकर होगी पूछताछ
लश्कर ए ताइबा आतंकी अब्दुल सुभान कोलकाता की अलीपोर जेल में अपने भांजे असाबुद्दीन से अप्रैल 2013 में मिलने गया था। अगस्त, 2013 में जब असाबुद्दीन को पेरोल मिली थी तब वह मेवात आया था और सुभान से मिला था।
यहां वह कई दिन रहा। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के विशेष पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि असाबुद्दीन ने पूछताछ में खुद को मेवात मोड्यूल का सदस्य स्वीकार किया है।
दिल्ली पुलिस असाबुद्दीन को ट्रांजिस्ट रिमांड पर दिल्ली लेकर आ गई है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब्दुल सुभान और असाबुद्दीन को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी।
पाकिस्तान से जेल में आते थे फोन
गौरतलब है कि खादिम शूज के मालिक पार्थोराय बर्मन के अपहरण मामले में असाबुद्दीन, अफताब अंसारी और अरसद अलीपोर जेल में हैं। अब्दुल सुभान भी कोलकाता जेल में था और वर्ष 2011 में जेल से बाहर आया था। इसके बाद वह आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार तफ्तीश में ये बात सामने आई है कि पाकिस्तान से कोलकाता की अलीपोर जेल में फोन आते रहते थे। कुछ फोन पाकिस्तान से अगस्त, 2013 में अलीपोर जेल में आए थे।
दिल्ली पुलिस इस बात की तफ्तीश कर रही है कि अलीपोर जेल में बंद किस कैदी की पाकिस्तान में बात हुई थी। हालांकि जांच में ये बात जरूर सामने आ चुकी है कि पाकिस्तान में बैठा लश्कर का एक बड़ा आतंकी कोलकाता की अलीपोर जेल में फोन करता था।
तिहाड़ जेल में मिलने के बाद बदमाश बने आतंकी
आतंकी संगठनों के आका और कमांडर एक समय शातिर बदमाश थे। ज्यादातर की तिहाड़ जेल में करीब एक दशक पहले एक-दूसरे से मुलाकात हुई थी। मेवात मॉड्यूल के गिरफ्तार आतंकी अब्दुल सुभान ने यह खुलासा किया है।
उसने बताया कि 1990 के दशक केअंत में जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी मौलाना मसूद अजहर और हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी मुश्ताक अहमद जारगर तिहाड़ जेल में बंद थे। कोलकाता का आसिफ रजा खान उर्फजाहिर और उसका भाई आमिर भी उस समय जेल में थे। ये दोनों शातिर बदमाश थे।
मसूद अजहर और मुश्ताक अहमद ने उन्हें आतंकवाद के लिए उकसाया था। इसके बाद दोनों भाई इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक सदस्य बन गए।