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ये हैं मुसीबत में फंसे AAP विधायक के पिता, पंक्चर बना करते हैं गुजारा

Fri, 17 Jun 2016 05:36 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Jun 2016 05:36 PM IST
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aap mla who facing charge of office of profit his father mends tyres and tubes
आप व‌िधायक प्रवीण देशमुख के प‌िता - फोटो : ह‌िंदुस्तान टाइम्स

दिल्ली के जंगपुरा से आम आदमी पार्टी के विधायक प्रवीण देशमुख जो इस समय ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले में फंसे हैं, उनके पिता भोपाल के जिंसी में अपनी एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। इस दुकान में वो टायर ट्यूब की मरम्मत का काम करते हैं।

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55 साल के पीएन देशमुख से जब उनके बेटे प्रवीण के बारे में बात की जाती है तो वो अपनी त्योरियां चढ़ा लेते हैं और ऐसा लगता है मानो कह रहे हों कि यह सब बकवास है।
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प्रवीण, शिक्षा मंत्री के संसदीय सचिव हैं और अन्य 20 संसद‌ीय सचिवों (विधायकों) के साथ ही वो भी भाजपा और कांग्रेस के निशाने पर हैं व कभी भी उनकी सदस्यता जा सकती है।
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प्रवीण ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है, और कहा है कि वो कोई लाभ का पद नहीं संभाल रहे हैं। प्रवीण वही विधायक हैं जिन्होंने सोशल मीडिया पर यह बात शेयर की थी कि वो दिल्ली के दो कमरों के किराए के मकाने में रहते हैं।

प‌िता बोले बेटे को नहीं धन दौलत की लालसा

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आप व‌िधायक प्रवीण कुमार

सुबह से शाम तक अपनी दुकान पर जी तोड़ मेहनत करने वाले प्रवीण के पिता पीएन देशमुख बताते हैं कि ना ही उनके बेटे को और ना ही उनके परिवार के किसी सदस्य को 'पॉवर और धन-दौलत की लालसा' है। प्रवीण के पिता तो ये तक कहते हैं कि विधायक बन जाने के बाद भी उनका बेटा दिल्ली में किराए के मकाने में अपने दोस्त के साथ रहता है।

प्रवीण के पिता बोले कि बेटे के विधायक बन जाने के बाद भी उनके रहन सहन में कोई बदलाव नहीं आया है वो पहले भी टायर-ट्यूब बनाते थे और आज भी वही करते हैं। वो बोले कि जब प्रवीण विधायक बना था तब उन्हें अच्छा लगा था, लेकिन एक साल बाद उन्हें अपने बेटे की साधारण जिंदगी और दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए की जा रही उसकी कड़ी मेहनत पर नाज है।

वो तो ये भी दावा करते हैं कि अगर उनके बेटे को लाभ की चिंता ही होती तो वो एक बड़ी और अच्छी कंपनी के ‌रीजनल मैनेजर की पोस्ट को कभी नहीं छोड़ता। प्रवीण के पिता ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि क्या होगा लेकिन अगर प्रवीण की सदस्यता जाती भी है तो कोई भी उसे सामाजिक कार्य करने से नहीं रोक सकता।

(साभार- ‌ह‌िंदुस्तान टाइम्स)

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