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AAP विधायक को अनोखी सजा: जानें क्यों कोर्ट में एक दिन खड़ा रखा अखिलेश पति त्रिपाठी को, तीन साल पुराना है मामला
Wed, 17 May 2023 08:43 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 17 May 2023 08:43 PM IST
सार
आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को छात्र को चोट पहुंचाने के मामले में अदालत उठने तक की सजा सुनाई गई। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध से बरी कर दिया गया।
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राऊज एवेन्यू कोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
अदालत ने बुधवार को आप विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को 2020 में एक छात्र को चोट पहुंचाने के आरोप में अदालत के उठने तक की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा ऐसा मामला समाज के लिए खतरा नहीं है। विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने यह कहते हुए आदेश पारित किया कि दोषी की समाज में गहरी जड़े हैं और वह समाज के लिए खतरा नहीं है।अदालत ने त्रिपाठी पर 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसमें से 6,500 रुपये अभियोजन पक्ष द्वारा खर्च की गई कार्यवाही की लागत के रूप में जमा किए जाएंगे और शेष राशि पीड़ित संजीव कुमार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
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अदालत ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि त्रिपारी समाज के लिए खतरा है। अदालत ने कहा दोषी की समाज में गहरी जड़े हैं और दोषी समाज के लिए खतरा नहीं है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और न्याय के सिरों को पूरा करने के लिए दोषी होने पर यह सजा उचित है। अदालत ने 25 मार्च को त्रिपाठी को आईपीसी की धारा 323 के तहत दोषी ठहराया था। आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत अपराध के लिए अधिकतम सजा एक वर्ष कारावास है।
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हालांकि, अदालत ने त्रिपाठी को यह कहते हुए कहा कि यह घटना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से उत्पन्न हुई, इस तथ्य को देखते हुए कि चुनाव अगले दिन होने वाले थे, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध से बरी कर दिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्राथमिकी फरवरी 2020 में एक छात्र की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसने दावा किया था कि 7 फरवरी 2020 को जब वह घर जा रहा था, तब आरोपी ने झंडेवालान चौक, लाल बाग में उसकी पिटाई की थी।
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