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विधानसभा के संकल्प पर विवाद नहीं हुआ शांत, 'आप' ने कहा- पूर्व पीएम का जिक्र संकल्प का हिस्सा नहीं

Sun, 23 Dec 2018 01:40 AM IST
vivek shukla ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: vivek shukla Updated Sun, 23 Dec 2018 01:40 AM IST
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AAP govt said former prime minister not a part of resolution
delhi assembly - फोटो : अमर उजाला

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भारत रत्न वापस लेने के विधानसभा से पारित संकल्प पर दूसरे दिन भी विवाद शांत नहीं हुआ। दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को भी दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री का जिक्र संकल्प का हिस्सा नहीं है।

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उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को मीडिया से कहा कि सिख दंगा मामले में चर्चा के बाद सदन के पटल पर जो प्रस्ताव रखा गया, उस पर कोई भी सुझाव देने के लिए सभी विधायक स्वतंत्र होते हैं। चर्चा के समय न केवल आप विधायक, बल्कि भाजपा के विधायक मनजिंद्र सिंह सिरसा ने भी एक सुझाव दिया था। कोई भी सुझाव तभी मान्य होता है, जब उस पर वोटिंग कराई जाए और उसके समर्थन में वोट पड़ें। राजीव गांधी का भारत रत्न वापस लेने की मांग सदन से पारित संकल्प का हिस्सा नहीं है।
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दूसरी तरफ, विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सदन में दिवंगत राजीव गांधी के लिए जो बातें बोली गईं, वह विधायक सोमनाथ भारती का निजी सुझाव था। सदन में ऐसा कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। असली प्रस्ताव में ऐसी कोई भी लाइन नहीं है। सौरभ ने कहा कि इस प्रस्ताव को उन्होंने ही सदन में रखा था। चर्चा के दौरान सोमनाथ भारती ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बारे में एक वक्तव्य रखा।
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फिर विधायक जरनैल सिंह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों पर अपनी बात रखी। सोमनाथ भारती ने संकल्प की जो कॉपी सभी विधायकों को दी जाती है, उसमें एक लाइन लिखकर जरनैल सिंह को दे दी। जरनैल सिंह ने उस लाइन को भी पढ़ दिया। साफ है कि सदन में स्व. राजीव गांधी जी के बारे में कोई भी प्रस्ताव पास नहीं हुआ।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि असल में सही संकल्प वो होता है, जिसकी प्रति विधानसभा में सभी विधायकों को दी जाती है। उसको रेज्यूलेशन प्लेस्ड ऑन द टेबल ऑफ द हाउस कहा जाता है। इस पर सभी विधायकों को अपना विचार रखने का हक है, लेकिन उसके लिए विधायक को अलग से स्पीकर को लिखित में देना होता है।

इसके बाद विधायक के विचार पर सदन में अलग से वोटिंग कराई जाती है। वोटिंग उस विचार के समर्थन में हो तो उस प्रस्ताव को पारित माना जाता है। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, इस प्रकार की कोई प्रक्रिया दिवंगत राजीव गांधी पर बोली गई लाइनों में नहीं अपनाई गई। असल प्रस्ताव की प्रतियां सभी विधायकों को और सदन के तुरंत बाद मीडिया को भी बांटी गईं। उसमें पूर्व प्रधानमंत्री के बारे में कोई लाइन नहीं है।

भावावेश में बोल गये जरनैल सिंह : गोयल

विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री से भारत रत्न वापस लेने की मांग मूल प्रस्ताव का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक जरनैल सिंह भावावेश में पूर्व प्रधानमंत्री के नाम का जिक्र कर गए। सदन में रखे गए मूल प्रस्ताव में इसका जिक्र नहीं था। ऐसे में यह प्रस्ताव का हिस्सा नहीं माना जाएगा।    

विशेषज्ञ बोले, पारित संकल्प विधानसभा की संपत्ति
इस मसले पर संविधानविदों का कहना है कि कोई संकल्प या प्रस्ताव सदन से पारित हो गया है तो वह विधानसभा की संपत्ति है। उसमें किसी तरह के बदलाव के लिए दोबारा प्रस्ताव लाना पड़ेगा। संविधानविद सुभाष कश्यप का कहना है कि उन्होंने सदन की कार्यवाही तो नहीं देखी, लेकिन इसकी एक प्रक्रिया है। सबसे पहले विधानसभा अध्यक्ष किसी सदस्य को संकल्प लाने के लिए सदन से इजाजत लेता है।

बहुमत का समर्थन मिलने के बाद संबंधित सदस्य संकल्प पढ़ता है। अध्यक्ष या किसी सदस्य को इस पर कोई आपत्ति है या वह संकल्प में कुछ संशोधन चाहता है तो वह उसे सदन के सामने रखता है। सदन का बहुमत इसके पक्ष है तो वह प्रस्ताव का हिस्सा होता है। अगर सदन की तरफ से कोई आपत्ति नहीं दर्ज कराई जाती और सदन उसे पास भी कर देता है तो प्रस्ताव सदन की संपत्ति हो जाता है। इसमें वह सभी बातें शामिल होती हैं, जिनका जिक्र संकल्प पढ़ने वाले सदस्य ने किया है।

जहां तक संकल्प वितरण का सवाल है तो जरूरी नहीं कि संकल्प पहले से सदस्यों को बांटा जाए। दूसरी तरफ, विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा का कहना है कि यदि विधायक ने संकल्प पढ़ते समय कोई बात कही है और उस पर वोटिंग हुई है तो उसे संकल्प का ही हिस्सा माना जाएगा। इसे वापस लेने का तरीका एक है कि कोई विधायक नोटिस देकर नया प्रस्ताव विधानसभा की अगली बैठक में लाए।

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