इनकम टैक्स की छापे को गलत क्यों ठहरा रही AAP?
व्यापारियों के साथ लंच में मोटा चंदा जुटा चुकी आम आदमी पार्टी ने व्यापार एवं कर विभाग के छापेमारी अभियान की मुखालफत की है। पार्टी का कहना है कि राजस्व वसूलने के नाम पर होने वाली छापेमारी घूसखोरी का का जरिया बन गई है। इसका डर दिखाकर कारोबारियों को परेशान किया जाता है। पार्टी ने अपनी दलीलों के हक में आंकड़े भी जारी किए हैं।
सोमवार को मीडिया से बात करते हुए आप नेता मनीष सिसोदिया ने वित्तीय वर्ष 2012-13 व 2013-14 की आखिरी तिमाही की सरकारी कमाई के आंकड़े जारी किए है। सिसोदिया का कहना है कि 2013-14 की आखिरी तिमाही में आप की 49 दिन की सरकार भी थी।
इस दौरान किसी कारोबारी के खिलाफ छापेमारी अभियान नहीं चला। बावजूद इसके व्यापार एवं कर विभाग ने 5666 करोड़ रुपये जमा किए थे। वहीं, अगली तिमाही में आंकड़ा 33 फीसदी गिरकर 3808 करोड़ रुपये पर आ गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2012-13 की आखिरी तिमाही में छापेमारी अभियान जारी रहते हुए सिर्फ 4600 करोड़ रुपये जमा किए गए।
सिसोदिया का कहना है कि आप सरकार के उलट व्यापार एवं कर विभाग औसतन हर महीने दो सौ रेड डालता है। फिर भी इससे राजस्व नहीं बढ़ा। इससे साफ है कि छापेमारी व्यापारियों को परेशान करने के लिए की जाती है।
राजस्व विभाग की छापेमारी पर क्या कहते हैं आप नेता
इसका राजस्व से कोई वास्ता नहीं होता। छापेमारी का डर दिखाकर अधिकारी अपनी जेब गरम करते हैं। सिसोदिया ने माना कि कारोबारी आम तौर पर ईमानदार होता है। वह कारोबार के नाम पर टैक्स चोरी नहीं करता है। जबकि हमारे सिस्टम ने कारोबारियों की बुरी इमेज बना रखी है। पार्टी कारोबारियों के उत्पीड़न के खिलाफ है।
आप की सरकार आने पर इसे रोका जाएगा। बता दें कि रविवार को पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के कारोबारियों के साथ लंच किया था। इस दौरान पार्टी को पचास लाख रुपये से ज्यादा का चंदा मिला था।
आप के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता ने बताया कि पार्टी का फंड जुटाने का अभियान पूरी तरह पारदर्शी है। पार्टी एक-एक पैसे का हिसाब दे रही है। सारा कुछ रोजाना ऑनलाइन रहता है।
गुप्ता ने चुनौती दी कि दूसरी पार्टियों को भी अपने फंडिग स्रोत को पारदर्शी करना चाहिए। जिससे आम लोगों को पता चल सके कि किसने किस पार्टी को कितना चंदा दिया है। इससे चुनावों में धनबल-बाहुबल को रोकने में मदद मिलेगी।