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इनकम टैक्स की छापे को गलत क्यों ठहरा रही AAP?

Tue, 02 Dec 2014 10:29 AM IST
Updated Tue, 02 Dec 2014 10:29 AM IST
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AAP blame to revenue department

व्यापारियों के साथ लंच में मोटा चंदा जुटा चुकी आम आदमी पार्टी ने व्यापार एवं कर विभाग के छापेमारी अभियान की मुखालफत की है। पार्टी का कहना है कि राजस्व वसूलने के नाम पर होने वाली छापेमारी घूसखोरी का का जरिया बन गई है। इसका डर दिखाकर कारोबारियों को परेशान किया जाता है। पार्टी ने अपनी दलीलों के हक में आंकड़े भी जारी किए हैं।

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सोमवार को मीडिया से बात करते हुए आप नेता मनीष सिसोदिया ने वित्तीय वर्ष 2012-13 व 2013-14 की आखिरी तिमाही की सरकारी कमाई के आंकड़े जारी किए है। सिसोदिया का कहना है कि 2013-14 की आखिरी तिमाही में आप की 49 दिन की सरकार भी थी।
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इस दौरान किसी कारोबारी के खिलाफ छापेमारी अभियान नहीं चला। बावजूद इसके व्यापार एवं कर विभाग ने 5666 करोड़ रुपये जमा किए थे। वहीं, अगली तिमाही में आंकड़ा 33 फीसदी गिरकर 3808 करोड़ रुपये पर आ गया। जबकि वित्तीय वर्ष 2012-13 की आखिरी तिमाही में छापेमारी अभियान जारी रहते हुए सिर्फ 4600 करोड़ रुपये जमा किए गए।
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सिसोदिया का कहना है कि आप सरकार के उलट व्यापार एवं कर विभाग औसतन हर महीने दो सौ रेड डालता है। फिर भी इससे राजस्व नहीं बढ़ा। इससे साफ है कि छापेमारी व्यापारियों को परेशान करने के लिए की जाती है।

राजस्व विभाग की छापेमारी पर क्या कहते हैं आप नेता

AAP blame to revenue department

इसका राजस्व से कोई वास्ता नहीं होता। छापेमारी का डर दिखाकर अधिकारी अपनी जेब गरम करते हैं। सिसोदिया ने माना कि कारोबारी आम तौर पर ईमानदार होता है। वह कारोबार के नाम पर टैक्स चोरी नहीं करता है। जबकि हमारे सिस्टम ने कारोबारियों की बुरी इमेज बना रखी है। पार्टी कारोबारियों के उत्पीड़न के खिलाफ है।

आप की सरकार आने पर इसे रोका जाएगा। बता दें कि रविवार को पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के कारोबारियों के साथ लंच किया था। इस दौरान पार्टी को पचास लाख रुपये से  ज्यादा का चंदा मिला था।

आप के राष्ट्रीय सचिव पंकज गुप्ता ने बताया कि पार्टी का फंड जुटाने का अभियान पूरी तरह पारदर्शी है। पार्टी एक-एक पैसे का हिसाब दे रही है। सारा कुछ रोजाना ऑनलाइन रहता है।

गुप्ता ने चुनौती दी कि दूसरी पार्टियों को भी अपने फंडिग स्रोत को पारदर्शी करना चाहिए। जिससे आम लोगों को पता चल सके कि किसने किस पार्टी को कितना चंदा दिया है। इससे चुनावों में धनबल-बाहुबल को रोकने में मदद मिलेगी।

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